शहर के बीचोंबीच चर्च बताकर पिछले चार साल से अवैध हॉस्टल चलाने व खुद को पादरी बताने वाला एंथनी दरअसल में प्रोटेस्टेंट प्रीचर (प्रचारक) था। जिस इमारत को प्रशासन की छापेमारी के दौरान वह चर्च बताता रहा, उसका इस्तेमाल दरअसल प्रीचिंग (उपदेश) हॉल के रूप में किया जाता था। पुलिस सूत्रों की मानें तो पूछताछ में एंथनी बच्चियों के यौन शोषण को लेकर अपना गुनाह कबूल कर चुका है।
पुलिस की प्राथमिक पूछताछ में यह भी सामने आया है कि वह प्रोटेस्टेंट ईसाई है और उसे प्रचार के लिए दिल्ली, केरल, जम्मू कश्मीर में रहने वाले प्रोटेस्टेंट ईसाईयों से चंदा मिलता था। हालांकि कठुआ का यह अवैध हॉस्टल किसी भी ईसाई मिशनरी संस्था के साथ जुड़ा हुआ नहीं रहा। एंथनी ने छापेमारी के समय अवैध हॉस्टल को पेंटाकास्टल मिशन के अधीन बताया था, लेकिन अब सामने आया है कि वह अपने स्तर पर ही यहां हॉस्टल चला रहा था। एसीआर जितेंद्र मिश्रा ने बताया कि पेंटाकास्टल मिशन कठुआ में कोई हॉस्टल होने से साफ इंकार कर चुका है।
कोठरी में कैदियों जैसी हालत में रखे गए थे बच्चे
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शुक्रवार को पारलीवंड की जिस इमारत पर पुलिस ने छापामारी की थी, वह इमारत एक कोठरी की तरह थी। दो भागों में बंटी इमारत के एक हिस्से में बच्चों को रखा जाता था। इसी इमारत के बेसमेंट में एक प्रचार भवन भी बनाया गया था, जहां हाल ही में कुछ और निर्माण भी चलाया जा रहा था। प्रचार भवन से एक और एग्जिट प्वांइट तैयार किया जा रहा था। कोठी में एक और इमारत थी, जिसके ग्रांउड फ्लोर में एंथनी रहता था। इस फ्लोर में तीन कमरे थे। एंथनी के अनुसार यहां बच्चों को आने की अनुमति नहीं थी, हालांकि बच्चों ने अधिकारियों को बताया था कि एंथनी इन्हीं में से एक कमरे में बच्चों को रात के समय लेकर जाता और गंदी हरकतें करता था। जानकारी के अनुसार यहां रहने वाले बच्चों को अकेले बाहर जाने की भी अनुमति नहीं थी। बच्चे सुबह यहीं से गाड़ी में पारलीवंड के सरकारी स्कूल तक जाते और वापस लौटते थे। ऐसे में अपने साथ हो रहे शोषण की जानकारी भी वे किसी को नहीं दे पा रहे थे।
रविवार को भी पुलिस के पहरे में रहे बच्चे
अवैध हॉस्टल से मुक्त करवाए गए बच्चे रविवार को भी जिला प्रशासन की देखभाल और पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच रहे। एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि बच्चों को पूरी देखभाल के बीच नारी निकेतन और बाल आश्रम में रखा गया है। फिलहाल, उन्हें किसी से भी मिलने की इजाजत नहीं दी जा रही है। ऐसा माना जा रहा है कि किसी दबाव में आकर बच्चे कहीं बयान न बदलें अत: प्रशासन मामले की जांच पूरी होने तक बच्चों को अपने पास ही रखेगा।