दोमाना। सद्गुरु के साथ जुड़ा रिश्ता सफल होता है। इसलिए शाश्वत संबंध को प्रत्येक व्यक्ति को मजबूत करना चाहिए। ऐसे सद्गुरु की तलाश करनी चाहिए, जो हमें हमारे अंतर जगत में प्रभु के दिव्य ज्योतिर्मय रूप का साक्षात्कार करवाए और ईश्वर रूपी मंजिल से मिलवा दे। यह उपदेश श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य साध्वी सरोज भारती ने संगत को दिया।
मिश्रीवाला में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से जारी श्री हरि कथा के दूसरे दिन साध्वी सरोज भारती ने सुदामा-भगवान श्रीकृष्ण प्रसंग सुना कर संगत को इसे आत्मसात करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब-जब मित्रता का जिक्र होता है, तब-तब श्रीकृष्ण और सुदामा की बात आती है। मानव जीवन में कई प्रकार के संबंध आते हैं। इनमें जन्मजात, संपादकीय और शाश्वत संबंध मुख्य हैं। एक तरफ द्रुपद और द्रोणाचार्य की मित्रता है। जिसका आधार और प्रारंभ स्वार्थ, लालच और अहंकार से होता है। यह संबंध समय के साथ-साथ ईर्ष्या, द्वेष, घृणा और शत्रुता में बदल जाता है। सुदामा ने भी मित्रता की परंतु उनकी मित्रता का आधार प्रेम और विश्वास है। इसलिए यह मित्रता सार्थक होती है, क्योंकि सुदामा ने अपना संबंध जगतगुरु के साथ जोड़ा है। इस मौके पर विशेष तौर पर स्वामी हरिदास आनंद, स्वामी सुचेता नंद, छतर सिंह, शक्ति दत्त शमा, रामपाल शर्मा और नारायण सिंह मन्हास आदि मौजूद रहे। कथा के बाद लंगर का भी आयोजन किया गया।