बागवानी विपणन विभाग के आंकड़े चौंकाने वाले हैं - वर्तमान में केवल 15% अखरोट ही विभाग के माध्यम से बेचा जाता है। सहायक निदेशक अश्वनी कुमार मानते हैं कि ग्रेडिंग व्यवस्था के अभाव और आर्गेनिक प्रमाणन के प्रचार की कमी ने स्थिति को बिगाड़ा है।कश्मीर के 70 हजार हेक्टेयर में होने वाली 2 लाख एमटी वार्षिक पैदावार को बचाने के लिए बागवानी विभाग ने नई पहल शुरू की है।
स्थिति सुधारने के लिए जरूरी कदम: तत्काल प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना
आर्गेनिक प्रमाणीकरण और जीआई टैगिंगमार्केटिंग और ब्रांडिंग पर विशेष ध्यान ग्रेडिंग व्यवस्था को मजबूत करना
- जिलेवार उत्पादनश्रीनगर: 165 एमटी
- गांदरबल: 5,454 एमटीबडगाम: 3,215 एमटी
- कुपवाड़ा: 8,824 एमटीअनंतनाग: 11,915 एमटी
- कुलगाम: 4,025 एमटीशोपियां: 3,270 एमटी
- पुलवामा: 5,520 एमटी
दस फीसदी अखरोट होता खालीअखरोट के थोक व्यापारी हरी मार्केट राकेश दीवान ने कहा कि दस फीसदी अखरोट खाली निकलता है। इसके अलावा छोटे आकार में आता है। लोग चीन के अखरोट को ज्यादा इसलिए भी पसंद करते हैं कि उसका साइज बड़ा है और गरी भी ज्यादा निकलती है। कश्मीरी अखरोट सख्त होता है। इस कारण भी बाजारों में डिमांड कम होती जा रही है।
कोटअखरोट की पैदावार बढ़ाने पर शोध चल रहा है। पर्वत किस्म को लांच करने की तैयारी है। कृषि समग्र विकास योजना के तहत भी अखरोट को बढ़ावा दिया जा रहा है। बागवानों के लिए प्रोसेसिंग यूनिट सहित अन्य सुविधाएं मिलेंगी। इससे बाजारों में मांग बढ़ेगी। प्रोसेसिंग यूनिट के बाद जीआई टैगिंग पर काम होगा।- डाॅ. प्रशांत बख्शी, एचओडी बागवानी, स्काॅस्ट जम्मू