माइग्रेंट पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच में खुलासा, कई संपत्तियों पर अवैध कब्जा। घाटी में आतंकवाद शुरू होने के 3 दशक बाद जमीन वापस दिलाने की कवायद तेज। 7312 शिकायतों में से 5081 मामलों का निपटारा, कुछ मामले अदालतों में विचाराधीन।
नब्बे के दशक में घाटी छोड़ने को मजबूर हुए कश्मीरी विस्थापितों को धमकियों के चलते अपनी संपत्तियां औने-पौने दाम पर बेचनी पड़ी थीं। कश्मीर माइग्रेंट पोर्टल पर दर्ज शिकायतों की जांच में खुलासा हुआ है कि कश्मीरी पंडित परिवारों को जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के आतंकी धमकियां देते थे। उन्हें इस कदर डराया गया कि वे घाटी वापसी की उम्मीद को छोड़ संपत्तियों को औने-पौने दाम पर बेच दें। सरकार ने बीते वर्ष माइग्रेंट पोर्टल बनाकर कश्मीरी पंडितों की शिकायतें ली हैं। सात हजार से ज्यादा शिकायतें मिलीं, जिनमें से करीब पांच हजार शिकायतों का निपटारा कर दिया गया है।
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पोर्टल पर आने वाली सभी शिकायतों के निस्तारण के लिए संबंधित जिलों के डीसी को अधिकार दिए गए हैं। सरकार से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि अब तक 7312 शिकायतें पोर्टल पर आईं जिसमें 5081 का निस्तारण कर दिया गया है। शेष 2231 मामलों पर तेजी से काम चल रहा है। कुछ मामले राजस्व कोर्ट में चल रहे हैं।
संपत्तियों को औने-पौने दामों में बेचने (डिस्ट्रेस सेल) के मामलों की जांच और पूछताछ के दौरान पता चला कि पड़ोसियों और चुनिंदा लोगों ने जेकेएलएफ के आतंकियों के नाम पर उन्हें डराया और धमकाया। जमीन व संपत्तियों पर कब्जे की धमकी दी। संपत्तियों को बेचने के लिए बाध्य किया। ऐसे में डरकर उन्होंने काफी कम कीमत में अपनी संपत्तियों को बेच डाला और घाटी की ओर मुड़कर नहीं देखा। जिन लोगों ने अपनी संपत्तियों को नहीं बेचा उन पर कब्जा कर लिया गया।
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सबसे ज्यादा शिकायतें श्रीनगर से
माइग्रेंट पोर्टल पर सबसे अधिक शिकायतें श्रीनगर से आईं। अनंतनाग दूसरे स्थान पर रहा। बताते हैं कि आतंकवाद के दौर में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने सबसे अधिक कहर श्रीनगर में बरपाया। कश्मीरी पंडितों की संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। कई मंदिरों को जला दिया गया। कई को तोड़ दिया गया।
कहां से कितनी शिकायतें
श्रीनगर 1653
अनंतनाग 1609
बारामुला 869
बडगाम 658
बांदीपोरा 103
गांदरबल 229
नब्बे के दशक में आतंकवाद के कारण घाटी में अपना घर-बार छोड़ने के लिए बाध्य हुए लोगों को न्याय मिलेगा। माइग्रेंट पोर्टल पर मिली शिकायतों को तेजी से निपटारा जा रहा है। कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। केंद्र सरकार की ओर से भी प्रयास किए जा रहे हैं। बजट में भी पर्याप्त राशि का प्रावधान किया गया है। पिछले बजट से 466 करोड़ रुपये अधिक 1188 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
सरकार को करनी चाहिए जांच
फिल्म द कश्मीर फाइल्स को लेकर देशभर में मचे हंगामे के बीच पोर्टल पर मिलीं शिकायतों की जांच के दौरान कश्मीरी पंडितों को डराने-धमकाने में जेकेएलएफ की भूमिका के सामने आने को पंडित समुदाय साधारण बात नहीं मानता है। कश्मीरी पंडित नेता और द रिकंसीलिएशन, रिहैबिलिटेशन एंड रिटर्न ऑफ माइग्रेंट्स के अध्यक्ष सतीश महालदार का कहना है कि फिल्म में कश्मीर और विस्थापन का सच दिखाया गया है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ बाकी है। पंडितों को डराने धमकाने के मामले की सरकार को पूरी तरह जांच कर कश्मीरी पंडितों को उनका हक दिया जाना चाहिए। 32 साल बाद उन्हें न्याय मिलना चाहिए। संपत्तियों पर हुए कब्जे हटाकर उन्हें मालिकाना हक मिलना चाहिए।