कश्मीर घाटी में शनिवार को त्राल में हुई मुठभेड़ में हिजबुल कमांडर सब्जार अहमद भट्ट के मारे जाने की घटना को सेना की बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है। सब्जार की मौत के बाद घाटी में हिंसा बड़े पैमाने पर भड़क रही है लेकिन हिजबुल दिशाविहीन होता नजर आ रहा है।
दरअसल आठ जुलाई को हिजबुल के पोस्टर ब्वॉय बुरहान वानी के मारे जाने के बाद अस्थायी रूप से हिज्ब की कमान सब्जार अहमद भट्ट को सौंपी गई थी। दक्षिणी कश्मीर के कई युवाओं को अपने संगठन में शामिल करने में सब्जार ने बड़ी भूमिका निभाई थी।
वहीं जाकिर मूसा के कमांडर बनने के बाद सब्जार ने सोशल मीडिया पर ज्यादा सक्त्रिस्य रहने की बजाए जमीनी स्तर पर पकड़ बनानी शुरू की, नतीजतन बुरहान के मारे जाने के कुछ ही महीनों के भीतर अनंतनाग, शोपियां, पुलवामा औऱ कुलगाम के कई युवा मुख्यधारा को छोड़कर आतंकी बन गए। हाल ही में हिजबुल कमांडर मूसा ने जब संगठन छोड़ा तो ऐसा माना जा रहा था कि 19 और 20 मई के बीच सब्जार के पास हिजबुल की कमान आ गई थी।