दिन-ब-दिन बढ़ रही सिल्ट और अतिक्रमण कश्मीर के प्राकृतिक जल स्रोतों के लिए खतरे की घंटी है। वन्य जीव विभाग के एशियन वाटर बर्ड सेंसस 2015 के ताजा सर्वेक्षण में खुलासा हुआ है कि इन स्रोतों का दायरा लगातार कम हो रहा है। विशेष तौर पर कश्मीर की वुल्लर झील का दायरा 70 फीसदी कम हो गया है।
अगर ऐसी ही हालत रही तो यह स्रोत खत्म हो जाएंगे और विदेशों से प्रवासी पक्षी भी यहां नहीं आएंगे। इससे इन झीलों का अस्तित्व खतरे में है। पिछले कुछ दशकों से वुल्लर झील सहित कश्मीर के होकरसर, शालुबग और हाईगाम वेटलैंड में सिल्ट जमा होने से इसका दायरा कम हुआ है।
वुल्लर झील 200 स्क्वेयर किलोमीटर के दायरे से सिमट कर 25 स्क्वेयर किलोमीटर तक पहुंच गई है। इसमें जमा हुई सिल्ट ने पानी के बढ़ने की क्षमता को 20 फीसदी कम कर दिया है। वहीं होकरसर झील में बाढ़ से भारी सिल्ट जमा हो गई। हाईगाम वेटलैंड भी 1400 स्क्वेयर किलोमीटर से 700 तक पहुंच गई है।
वहीं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने केंद्र सरकार को इन स्रोतों के कम होते पानी का कारण यहां जमा होने वाली सिल्ट और अतिक्रमण बताया है। कश्मीर में पिछले साल आई बाढ़ का कारण भी इन प्राकृतिक स्रोतों के साथ छेड़छाड़ बताया गया था। अब वन्यजीव विभाग के सेंसस में भी यही कारण बताया जा रहा है।