कश्मीर में बने माहौल के कारण बनिहाल-बारामुला रेल सेवा प्रभावित है। रेल सेवा प्रभावित होने से रेलवे को प्रतिदिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके साथ ही आम लोगों को भी कई प्रकार की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
घाटी से बस और रेल सेवा प्रभावित होने से फंसे लोगों को यातायात की उचित सुविधा नहीं मिल रही है। घाटी में बनिहाल से श्रीनगर के बीच 15 जोड़ी डीएमयू ट्रेन प्रतिदिन चलती है, जिसमें प्रतिदिन तीस हजार के करीब लोग सफर करते हैं। रेलवे प्रतिदिन टिकट की खरीद से तीन लाख के करीब राजस्व जुटाता है।
137 किमी लंबे रेल मार्ग पर बारामुला से बनिहाल तक दो घंटे का सफर है। जबकि सड़क मार्ग से पांच से छह घंटे लगते हैं। रेलवे की एक रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में 92 बार रेल सेवा बाधित रही है। जबकि 2019 के पहले तीन माह में 18 बार ट्रेन सेवा ठप रही है।
अमरनाथ यात्रा के दौरान ट्रेन सेवा को सुबह 10 से दोपहर तीन बजे तक स्थगित किया गया था। बारामुला से बनिहाल तक चलने वाली 15 जोड़ी डीएमयू चलती है। एक डीएमयू में छह के करीब बोगियां होती हैं। हर बोगी में 112 के करीब लोग बैठते हैं। यानी एक डीएमयू में 672 के करीब यात्री सफर करते हैं। बनिहाल से बारामुला तक 30 रुपये प्रति व्यक्ति किराया है। ऐसे में एक दिन घाटी में रेल सेवा बाधित होने से रेलवे को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होता है।
पिछले सप्ताह से घाटी में उपजे तनाव के कारण रेल सेवा प्रभावित है। बनिहाल से बारामुला तक ट्रेन 17 के करीब रेलवे स्टेशनों से होकर गुजरती है। घाटी में आए दिन हड़ताल और सुरक्षा कारणों से रेल सेवा को बाधित किया जाता रहा है।
"सरकार ट्रेन चलाना चाहती है, लेकिन कुछ कारणों से उसके नहीं चलने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। घाटी में ट्रेन सेवा प्रभावित होने से होना वाला नुकसान करोड़ों में है। इसमें यात्री टिकट से होने वाले राजस्व के साथ ट्रेन के चलाने में आने वाला खर्च भी शामिल होता है।"-दीपक कुमार, सीपीआरओ, नॉर्दर्न रेलवे