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Target Killing: लक्षित हत्याओं के लिए रेकी करने वालों को भी मिले सजा- पूरण कृष्ण भट के परिजन

Wed, 21 Dec 2022 11:27 AM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

वारदात के बाद चौधरी गुंड में हालात बिल्कुल बदल गए हैं। उनका परिवार 1989 में पलायन के दौरान भी शोपियां छोड़ कर जम्मू नहीं आया था, लेकिन इस घटना के बाद से अपनी नौकरी और पुश्तैनी घर को छोड़कर परिवार सहित जम्मू आ गए हैं।
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कश्मीरी पंडित पूरण भट के परिजन - फोटो : संवाद
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विस्तार
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कश्मीर घाटी के शोपियां में सुरक्षाबलों द्वारा मुठभेड़ में मार गिराए गए तीन आतंकियों में से एक लतिफ लोन कश्मीरी पंडित पूरण कृष्ण भट की हत्या में शामिल था। आतंकी की मौत की खबर से पूरण कृष्ण भट के परिजनों को कुछ राहत मिली है। हालांकि उनका कहना है कि जो लोग रेकी करते हैं और सूचनाएं आतंकियों तक पहुंचाते हैं, उन्हें भी कड़ी सजा दी जानी चाहिए। 

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दिवंगत पूरण कृष्ण भट के भाई अश्वनी भट ने कहा कि आज आतंकी लतिफ की मौत की खबर के बाद से ही रिश्तेदार और अन्य परिचित लोग उनके घर पहुंचे। 15 अक्तूबर को शोपियां के चौधरी गुंड में उनके भाई की हुई लक्षित हत्या को याद करते उनकी आंखें भर आई। उन्होंने कहा कि वो दिन वह कभी नहीं भूल सकते हैं। आतंकियों की गोलियों से खून से लथपथ उनके भाई को किसी तरह अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका था। आज भाई के कातिल की मौत की खबर से उन्हें कुछ राहत मिली है, लेकिन जो रेकी करने में शामिल हैं, उन्हें भी सजा दी जानी चाहिए।
 
टारगेट किंलिंग के बाद जम्मू लौट आए 19 कश्मीरी पंडित परिवार

अश्वनी भट बताते हैं कि इस वारदात के बाद चौधरी गुंड में हालात बिल्कुल बदल गए हैं। उनका परिवार 1989 में पलायन के दौरान भी शोपियां छोड़ कर जम्मू नहीं आया था, लेकिन इस घटना के बाद से अपनी नौकरी और पुश्तैनी घर को छोड़कर परिवार सहित जम्मू आ गए हैं। इतना ही नहीं यहां से 19 अन्य कश्मीरी पंडित  खौफ के चलते जम्मू आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि 1997 में उनकी शिक्षक की नौकरी लगी थी। वह शोपियां जिले के हायर सेकेंडरी स्कूल ब्वायज कपरीन में तैनात थे, लेकिन इस घटना के बाद वह भी घर छोड़कर वहां से आ गए। 
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उनका बेटा शिवम भट भी पीएम पैकेज के तहत घाटी में राजस्व विभाग में कार्यरत है, लेकिन अब वह भी जम्मू आ गया है। उनका 150 कनाल जमीन में सेब का बाग है, जिसकी देखभाल के लिए वहां पर कोई भी नहीं है। सरकार ने उनके बच्चों की शिक्षा का जिम्मा तो उठाया है लेकिन शिक्षा के अलावा घर का और भी बहुत सारा खर्चा होता है। उप राज्यपाल द्वारा पांच लाख रुपए और रेडक्रॉस की ओर से दो लाख रुपए दिए गए थे। बच्चो के पालन पोषण के लिए सरकार ने पूरण भट की पत्नी को जो नौकरी देने का वादा किया है। उसका काम धीमी गति से चल रहा है। प्रशासन से मांग है कि उसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि बच्चों का पालन पोषण सही तरीके से किया जा सके। 

माइग्रेशन कार्ड बनाए जाने की मांग

अश्वनी भट ने बताया कि उनका माइग्रेशन का कार्ड बनाया जाए, ताकि उनको भी माइग्रेशन केंद्र का लाभ मिल सके। उन्होंने सरकार से मांग करते हुए कहा कि घाटी में हालात स्थिर नहीं है। ऐसे माहौल में वहां पर नौकरी करना और रहना आसान नहीं है। उन्हें, उनके बेटे और घाटी में पीएम पैकेज के तहत कार्यरत कर्मचारियों को जम्मू में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।

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