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कारगिल गाथा: वतन के दीवानों ने मोर्चा दर मोर्चा दिलाई फतह

Sun, 03 Jul 2016 12:17 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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कारग‌िल युद्ध - फोटो : File Photo
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एक ऐसा युद्ध जिसकी न तो कोई खबर थी और न तैयारी। एक चरवाहे ने घुसपैठियों की सूचना भर दी थी, जिसकी टोह लेने गया सैन्य दल गायब हो गया। माजरा समझ में आने से पहले ही पाकिस्तानी फौज ने गोले बरसा दिए। अचानक विश्व इतिहास के सबसे कठिन और जोखिम भरे युद्ध की चुनौती सामने खड़ी थी।
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सामरिक महत्व की ऊंचाई पर पूरी तैयारी के साथ बैठे दुश्मन से लड़ने के शुरुआती कदम कारगर नहीं हो पाए। रणनीति, सैन्य बल और मारक अस्त्र भी जब काम न आए तो वेतन के दीवानों ने मोर्चा दर मोर्चा फतह दिलाई। अमर उजाला 26 जुलाई को मनाए जाने वाले कारगिल दिवस (विजय दिवस) से जुड़ी यादों को ताजा करने के लिए विशेष शृंखला शुरू कर रहा है।

सबसे मुश्किल थी तोलोलिंग की चुनौती
कारगिल युद्ध में तोलोलिंग का मोर्चा विश्व इतिहास का सबसे मुश्किल मोर्चा माना जाता है। 20 मई को इसे वापस हासिल करने की कोशिशें शुरू हुईं। खड़ी चढ़ाई की वजह से सैनिकों के बैग से 2 किलोग्राम खाद्य सामग्री के पैकेट निकलवाए गए, ताकि ज्यादा असलहा ले जाया जा सके। कारगिल के शहीदों में से आधे तो तोलोलिंग में शहीद हो गए।
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भारत ने खोए 527 जांबाज
युद्ध में भारत ने 527 जांबाज खोए, 1363 जख्मी हुए और एक को युद्धबंदी बनाया गया। पाकिस्तान को ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा। पाकिस्तानी हमलावरों में से 1700 मारे गए, एक हजार घायल हुए और आठ को युद्धबंदी बनाया गया।

एक जुलाई को शहीद हुए थे अब्दुल करीम 
12 जैक लाई में हवलदार अब्दुल करीम कारगिल के मोर्चे पर डटे हुए थे। 1 जुलाई, 1999 को उन्होंने शहादत पाई। कठुआ के तारानगर में रह रहे उनके परिवार से बेटे रफीक और पत्नी गुड्डी देवी ने कहा वह उधमपुर के रहने वाले हैं, लेकिन कारगिल युद्ध के दौरान कठुआ में किराये के मकान में रह रहे थे। अचानक उनकी शहादत की खबर ने बदहवास कर दिया था।
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घुसपैठ से युद्ध तक

युद्ध के दौरान गोलाबारी करतीं बोफोर्स तोपें - फोटो : File Photo
3 मई 1999 : अपने याक को खोजने निकले बटालिक सेक्टर के गारखुन गांव के चरवाहे ताशी नामग्याल ने काले कपड़े पहने छह संदिग्धों को खुदाई करते देखा तो सेना को सूचना दी।
 5 मई : सेना ने पेट्रोलिंग पार्टी भेजी जो लापता हो गई। बाद में पता चला था पांच सदस्यों को पाकिस्तानी फौज ने यातनाएं देकर उन्हें मौत के घाट उतार दिया। 
 9 मई : पाकिस्तान ने कारगिल पर गोलाबारी कर दी।
10 मई : द्रास, काकसर और मशकोह सेक्टर में बड़े पैमाने पर घुसपैठ हुई। 
15 मई : भारतीय सेना का दल कारगिल सेक्टर की ओर बढ़ गया।
 26 मई : वायु सेना ने हवाई बमबारी की।
 28 मई : वायु सेना का एमआई-17 पाकिस्तानी गोलाबारी का शिकार हो गया। चार जवान शहीद हो गए। 
1 जून 1999 : पाकिस्तान ने नेशनल हाईवे-1ए पर बम बरसाए।
 5 जून : भारत ने दस्तावेज और 11 जून को पकड़े गए इंटरसेप्ट जारी किए, जिसमें परवेज मुशर्रफ सहित अन्य पाकिस्तान के सैन्य अफसरों की कारगिल से जुड़ी बातचीत शामिल थी।
 13 जून : द्रास की तोलोलिंग पोस्ट जीती
 29 जून :  प्वाइंट 5060 फतह और प्वाइंट 5100 पर भारतीय सेना ने फिर से कब्जा लिया। 
 
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