मामले के अनुसार 23 दिसंबर 2017 को सुबह करीब चार बजे सुमित कौल कार से मुंबई से राजकोट जा रहे थे। आरोप था कि चालक सचिन चालके तेज रफ्तार और लापरवाही से कार चला रहा था। मौजे धमदाची के पास नेशनल हाईवे-8 (मुंबई-अहमदाबाद हाईवे) पर चालक कार पर नियंत्रण खो बैठा और कार आगे जा रहे ट्रक से टकरा गई। हादसे में सुमित कौल की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के करीब नौ महीने बाद 7 सितंबर 2018 को मोटर दुर्घटना दावा अभिकरण में मुआवजे की याचिका दायर की गई। सुमित कौल की नाबालिग बेटी अक्षया कौल की ओर से उनकी मां विजय और पिता महाराज कृष्ण ने याचिका दायर की। कार चालक सचिन चालके, कार मालकिन एना जगदीश बख्शी और बीमा कंपनी बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस को मामले में प्रतिवादी बनाया गया। हादसे के समय 35 वर्षीय सुमित कौल मुंबई के एक निजी बैंक में मैनेजर थे और उन्हें 88,149 रुपये मासिक वेतन मिल रहा था। याचिकाकर्ताओं ने नौ फीसदी सालाना ब्याज के साथ 1,50,50,000 रुपये मुआवजे की मांग की थी।
मामले में चालक और कार मालकिन को क्रमश
12 जुलाई 2021 और 4 सितंबर 2023 को एक-पक्षीय घोषित कर दिया गया। सभी पक्षों को सुनने के बाद अभिकरण ने 1,28,97,690 रुपये मुआवजा तय किया और इसके भुगतान की जिम्मेदारी बीमा कंपनी पर डाली। राशि पर दावा दायर करने की तारीख से भुगतान तक 7.5 फीसदी सालाना साधारण ब्याज भी देना होगा।
कार मालकिन की आपत्ति
वाहन मालकिन ने कहा कि कार का प्राइवेट कार पैकेज इंश्योरेंस पॉलिसी के तहत व्यापक बीमा था, जिसमें कार में सवार लोगों का जोखिम भी कवर था। हादसे में वाहन को हुए नुकसान का दावा बीमा कंपनी ने दुर्घटना की पुष्टि, ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन के दस्तावेज की जांच के बाद निपटा दिया था। लिहाजा, यदि याचिकाकर्ताओं का दावा साबित होता है और मुआवजा तय किया जाता है तो उसका भुगतान बीमा कंपनी को करना चाहिए।
बीमा कंपनी की आपत्ति
बीमा कंपनी ने याचिका के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि दुर्घटना के समय वाहन चालक के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं था और उसे वाहन सौंपना पॉलिसी की शर्तों का उल्लंघन है। कंपनी ने हादसे को अज्ञात ट्रक की टक्कर बताते हुए इसे हिट एंड रन के प्रावधानों के तहत आने वाला मामला बताया। साथ ही ट्रक के चालक, मालिक और बीमाकर्ता को पक्षकार नहीं बनाए जाने पर आपत्ति जताई। कंपनी ने दावा राशि को भी अत्यधिक बताते हुए याचिका खारिज करने की मांग की।