रियासत की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती
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महबूबा ने कहा कि पहले लोगों को जुमे का इंतजार रहता था। अब इसे जुमे पत्थर बनाकर रख दिया गया। मस्जिदों से पत्थरबाजी होती है। लोग मस्जिदों में नमाज पढ़ने जाने से कतराने लगे हैं कि पता नहीं कहां से पत्थर आए और वे इसका निशाना बन जाएं।
कहा कि लोग उन्हें एंटी कश्मीरी कहते हैं। कश्मीरियत तो आपस में मिलकर रहने की बात करता है और यही इस्लाम भी है। हम मुस्लिम बहुल राज्य है। आपस में मिल जुलकर रहें तो पूरे विश्व को इस्लाम का संदेश भी दे सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें कुर्सी पर चिपककर बैठने का शौक नहीं है। भाई बहन ने पिता की बात याद दिलाई तो वह इस कुर्सी पर हैं। अब जब तक यहां हैं तो एजेंडा आफ एलायंस के साथ इंसाफ करेंगी। उनकी जिंदगी का एजेंडा पिता को खुश रखना है। पिता उन्हें डाक्टर बनाना चाहते थे, लेकिन नहीं बन पाईं। चुनाव भी उन्होंने पिता को खुश करने की खातिर लड़े।