रियासत के श्रीनगर और जम्मू शहर में भेजी गईं जेएनएनयूआरएम की बसें पांच साल में ही दम तोड़ गईं। अधिकतर बसें खस्ताहाल हो गई हैं, जिनको चालक मुश्किल से चला पा रहे हैं। दरअसल, इन बसों की स्पीड तय की गई थी। चलाने के लिए दस साल की अवधि तय की गई, लेकिन बसों को पांच साल में ही इतना चला दिया कि अब यह दम तोड़ रही हैं।
जेएनएनयूआरएम के तहत केंद्र से राज्य को 150 बसें मिली हैं। इनमें से 75 श्रीनगर शहर और 75 जम्मू के लिए भेजी गईं। इनको शहर और इसके आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे को कनेक्ट कर चलना था। इन बसों का हाईटेक तकनीक से तैयार किया गया। इनका निर्माण ही इस लिहाज से किया गया कि यह 40 किलोमीटर के दायरे में चलें और दस साल तक चलें।
लेकिन इन बसों का इस्तेमाल शहर और आसपास के इलाकों को जोड़ने के बजाय लंबी दूरी तक चलाया गया। अब आलम यह है कि बसों ने दम तोड़ दिया है। बसों को अंतर राज्यीय और अंतर जिला के लिए चलाया जा रहा है। इसमें इनकी स्पीड 150 तक पहुंच जाती है। इसलिए जिन बसों को दस साल में जितने किलोमीटर चलना था, वो पांच साल में ही चला दिया गया।
अब बसों की स्थिति यह है कि इनमें जान ही नहीं। चालक इनको मुश्किल से चला पा रहे हैं। निगम के जनरल मैनेजर आपरेशन आरएस जंबाल का कहना है कि इन बसों को मुश्किल से चलाया जा रहा है। बसों का शहर में चलाया जा सकता था, लेकिन कुछ कारणों से इनको नहीं चलाया गया।
नहीं चलने की वजह
राज्य परिवहन निगम ने इन बसों को शहर में नहीं चलाया। तर्क दिया गया कि शहर की सड़कें तंग हैं और इनके चलने से जाम लग जाएगा। लेकिन सच यह है कि शहर के कुछ हिस्सों से आसपास के इलाकों को जोड़ने के लिए इन बसों का आसानी से चलाया जा सकता था।
इसके लिए रूट भी तय किए गए। सूत्रों की मानें तो शहर में निजी ट्रांसपोर्टरों के दबाव में निगम ने इन बसों को नहीं चलाया। क्योंकि इन बसों के चलने से निजी ट्रांसपोर्टरों को नुकसान हो रहा था।