एसआई भर्ती में धांधली मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इसलिए सरकार चाहती है कि सीबीआई की जांच शुरू होने से पहले ही अफसरों पर कार्रवाई की जाए, ताकि सीबीआई को इन पर कार्रवाई करने में कोई दिक्कत न आए।
बहुचर्चित जम्मू-कश्मीर पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती में धांधली के मामले में भर्ती बोर्ड के छह अफसरों के नाम सामने आ रहे हैं। उपराज्यपाल प्रशासन इन अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी में है। कार्रवाई एक-दो दिन में संभव है।
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एसआई भर्ती में धांधली मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई है। इसलिए सरकार चाहती है कि सीबीआई की जांच शुरू होने से पहले ही अफसरों पर कार्रवाई की जाए, ताकि सीबीआई को इन पर कार्रवाई करने में कोई दिक्कत न आए। उल्लेखनीय है कि इस धांधली की जांच गृह सचिव आरके गोयल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी ने की थी।
इसमें जांच कमेटी ने पाया कि भर्ती में धांधली हुई है, लिहाजा इसे रद्द करके सीबीआई जांच करवाई जाए। दूसरी तरफ सरकार ने पुलिस और क्राइम ब्रांच जैसी एजेंसियों से भी प्रारंभिक स्तर की जांच कराई। जांच के दौरान भर्ती बोर्ड से जुड़े छह अफसरों के नाम सामने आए हैं। इसकी जानकारी उपराज्यपाल को दी गई। जिसके बाद उपराज्यपाल इन अफसरों पर कार्रवाई करने की तैयारी में है।
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कुछ लोगों से हो चुकी है पूछताछ
सूत्रों का कहना है कि क्राइम ब्रांच ने भी एसआई भर्ती मामले की अपने स्तर पर जांच की है। इसमें भर्ती बोर्ड से जुड़े लोगों के धांधली में संलिप्त होने की जानकारी मिली है। क्राइम ब्रांच ने धांधली से जुड़े लोगों से पूछताछ की थी। वहीं गृह सचिव के नेतृत्व वाली समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में बताया था कि बड़े स्तर पर धांधली हुई है। कुछ अफसर भी इसमें शामिल हैं, जिन्हें जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए। इसे देखते हुए एलजी ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी।
कई राज्यों में प्रतिबंधित है एसआई भर्ती करने वाली कंपनी
सब इंस्पेक्टरों की भर्ती मामले में भर्ती करने वाली एजेंसी को ठेका देने पर एसएसबी सवालों के घेरे में है। एजेंसी को कई राज्यों और विभागों ने प्रतिबंधित कर रखा है, बावजूद इसके कंपनी को एसएसबी ने बिना नियमों में बदलाव किए भर्ती का ठेका दे दिया। ऐसे में जब सीबीआई इस मामले की जांच शुरू करने की तैयारी में है तो एसएसबी के अधिकारियों और उक्त कंपनी से पूछताछ भी संभव है। ऐसा भी माना जा रहा है कि एसएसबी के भर्ती के समय रहने वाले अफसरों पर कार्रवाई की जा सकती है।
जानकारी के अनुसार भर्ती कंपनी को ऑयल एवं नेचुरल गैस कारपोरेशन की ओर से प्रतिबंधित किया जा चुका है। पीजीआई भी ऐसा कर चुकी है, जबकि झारखंड सरकार भी ऐसा कर चुकी है। कंपनी द्वारा भर्ती में सही काम न करने को लेकर ऐसा किया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि सबकुछ जानते हुए भी लिखित परीक्षा से लेकर आवेदन तक लेने के लिए कंपनी को जिम्मा दिया गया। एसआई भर्ती की धांधली के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले अभ्यर्थियों का कहना है कि जिस भर्ती कंपनी को जिम्मा दिया गया है, उसका रिकॉर्ड पता होने के बाद भी भर्ती का ठेका क्यों दिया गया। इसकी सीबीआई को गहनता से जांच करनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी कंपनी से भर्ती करवाई जाए तो उसका रिकॉर्ड देखकर ही भर्ती कराई जाए।