जम्मू-कश्मीर पुलिस सब इंस्पेक्टर (एसआई) की 1200 पदों पर भर्ती परीक्षा दोबारा रद्द होने की सूचना से अभ्यर्थियों में निराशा का माहौल है। युवा सरकार से खफा हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि बोर्ड ने जानबूझकर ब्लेकलिस्टेड एजेंसी को भर्ती करवाने की जिम्मेदारी दी, जबकि बोर्ड को इसकी पहले ही जानकारी थी।
जेकेपीएसआई के अभ्यर्थी आकाश भगत ने कहा कि सरकार जानबूझकर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार नहीं चाहती कि युवाओं को सरकारी नौकरी मिले। उन्हें निजी क्षेत्र की ओर धकेलने का प्रयास किया जा रहा है। अगर जेकेएसएसबी परीक्षा आयोजित करने में सक्षम नहीं तो जेकेपीएससी या यूपीएससी को परीक्षा आयोजित करने का जिम्मा सौंपना चाहिए था।
अभ्यर्थी शुभम लंगर ने कहा कि परीक्षा लेने के बाद उसे रद्द कर दिया जाता है। सरकार युवाओं के लिए परेशानी का सबब बन गई। वर्तमान समय में युवा पीढ़ी विषम परिस्थितियों से गुजर रही है। अभ्यर्थी कोचिंग पर हजारों रुपये खर्च कर रहे हैं। इस बात से सरकार को मतलब नहीं है। कई आयु सीमा भी पूरी कर चुके हैं। वह आखिरी बार परीक्षा दे रहे थे, लेकिन उन्हें फिर भी अधिकार से वंचित रखा गया है।
अभ्यर्थी पल्लवी शर्मा ने कहा कि पहले भी जेकेपीएसआई की परीक्षा रद्द कर दी गई थी। दूसरी बार फिर परीक्षा रद्द करने की सूचना मिली है। बोर्ड की खामियों का खमियाजा युवाओं को भुगतना पड़ा रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवा कोचिंग संस्थानों में पैसा खर्च करते हैं। अब भविष्य की चिंता सता रही है। परीक्षा देने के बाद भी हाथ खाली है। कोई उम्मीद नहीं रही।
अभ्यर्थी सिमरन जीत कौर का कहना है कि 16 दिसंबर को उनकी परीक्षा थी, लेकिन उससे पहले ही बुरी खबर सुनने को मिली। उन्होंने कहा कि परीक्षा रद्द होना उनके लिए परेशानी बन गई है। जमीनी स्तर पर प्रशासन कुछ नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा कि आयु भी बीत रही है। जीवन के सारे सपने इस वजह से अधूरे रहे गए हैं। सरकार युवाओं के दुख की दास्तां सुनने में असफल साबित हो रही है।