कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले के तथ्य गंभीर हैं। इन तथ्यों का मूल्यांकन किया जाए और यह लोग अपने मंसूबे में सफल होते हैं, तो अयोग्य उम्मीदवारों को शीर्ष पदों को सुरक्षित करने की अनुमति मिल जाती है।
सब इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती घोटाले में गिरफ्तार तीन आरोपियों को अदालत ने जमानत देने से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि आरोपियों ने पेपर लीक किया है, जिससे युवाओं का भविष्य खराब हुआ है। वास्तव में इनके कृत्य की तुलना लाखों रुपये के घोटालों से नहीं की जा सकती है।
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यह बड़े पैमाने पर जनता के खिलाफ एक संगठित अपराध है। दल दलीलों के साथ जिला द्वितीय न्यायाधीश बलवीर लाल ने आरोपी आशीष यादव, सुरेंद्र सिंह और पवन कुमार की जमानज अर्जी खारिज कर दी। इसके पहले दोनों तरफ की दलीलें सुनी गईं।
न्यायाधीश ने कहा कि उक्त मामले के तथ्य प्रकृति में गंभीर हैं। यदि तथ्यों का मूल्यांकन किया जाए और यह लोग अपने मंसूबे में सफल होते हैं, तो अयोग्य उम्मीदवारों को शीर्ष पदों को सुरक्षित करने की अनुमति मिल जाती है।
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यह न केवल योग्य उम्मीदवारों को इससे वंचित करता है बल्कि यह समाज को योग्य और सक्षम अधिकारियों से भी वंचित करता है। यदि आरोपी व्यक्तियों के हिस्से में जमानत पर विचार किया जाता है तो यह उन छात्रों को प्रभावित करेगा जिन्होंने चौबीसों घंटे ईमानदारी से मेहनत की है।
मेरे विचार से एक सामान्य अपराध आम तौर पर लोगों की कम संख्या को प्रभावित करता है और आमतौर पर पीड़ितों की शारीरिक भलाई पर प्रभाव के रूप में होता है। दूसरी ओर एक आर्थिक अपराध भी ईमानदार नागरिकों के दिमाग पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
ऐसे अपराधियों को जमानत देना, जहां जांच चल रही है, निश्चित रूप से बड़े पैमाने पर जनता की भावनाओं को आहत करता है और जांच भी हताशा की ओर भी जाती है। इन दलीलों के साथ जमानत अर्जी को खारिज कर दिया।