प्रदेश में चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी के संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति वसीम सादिक नरगल ने दो सप्ताह के अंदर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने करने के निर्देश दिए हैं।
ऐसा न करने पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संबंधित अधिकारियों को अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया जा सकता है। यह महत्वपूर्ण आदेश आरटीआई कार्यकर्ता बलविंदर सिंह द्वारा दायर बहुप्रचारित जनहित याचिका (पीआईएल) में पारित किया गया है।
इसमें याचिकाकर्ता ने जम्मू प्रांत में 259 पीएचसी में स्टाफ उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग की है। जम्मू प्रांत के सभी जिलों के पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में पीएचसी और सीएचसी में डॉक्टरों के 184 पद खाली हैं।
उपजिला अस्पतालों, जिला अस्पतालों में चिकित्सा अधिकारियों, सलाहकारों और पैरा-मेडिकल स्टाफ सहित कर्मचारियों की कमी है। एडवोकेट शेख शकील अहमद की सुनवाई के बाद कहा कि न्यायालय ने 16 मार्च 2023 के आदेश द्वारा यह पता लगाने के लिए समय दिया था कि चिकित्सा अधिकारियों के 380 पदों के संबंध में चयन प्रक्रिया कब से लंबित है।
इसी प्रकार राज्य सरकार को स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन विभिन्न जन स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत पैरा मेडिकल स्टाफ सहित चिकित्सा अधिकारियों (चिकित्सकों) के अलावा जिलेवार मौजूदा स्वीकृत स्टाफ की स्थिति का विवरण उपलब्ध कराना भी अपेक्षित था।
यूटी लद्दाख के लिए उपस्थित डिप्टी सॉलिसिटर जनरल विशाल शर्मा को आवश्यक जानकारी प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया। अगली तारीख तक या उससे पहले आवश्यक कार्रवाई करने के लिए दो सप्ताह का और समय दिया गया है।
जिसमें विफल होने पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जा सकता है। सुनवाई की अगली तारीख पर अदालत के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। - जेएनएफ