कट्टर अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई को लेकर मचा बवाल थम नहीं पा रहा है। इस बीच, रियासत सरकार द्वारा कुछ और राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की चर्चाओं के चलते संसद में भी केंद्र सरकार को विपक्ष को जवाब देते नहीं बन रहा।
कुछ अन्य राजनीतिक कैदियों को रिहा करने की अटकलों को खारिज करते हुए मंगलवार को राज्य के गृह सचिव सुरेश कुमार ने साफ किया कि और राजनीतिक कैदियों को रिहा नहीं किया जाएगा।
हालांकि, मसर्रत आलम की रिहाई के बाद ही पुलिस विभाग की ओर से स्पष्ट कर दिया गया था कि वर्तमान में मसर्रत आलम के सिवा जेलों में कोई भी राजनीतिक बंदी नहीं है।
मसर्रत आलम को रिहा किए जाने के संबंध में गृह सचिव सुरेश कुमार का कहना था कि प्रशासन और सरकार देश का कानून मानने के लिए बाध्य है।