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जम्मू-कश्मीर का विवाद नेहरू के सियासी मॉडल की नाकामी

Mon, 22 Aug 2016 12:22 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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डॉ. जितेंद्र सिंह - फोटो : Amar Ujala
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प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान जम्मू कश्मीर को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के सियासी मडल की नाकामी का प्रतीक बताया है।
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कार्यक्रम में डा. जितेंद्र ने कहा कि महाराजा हरि सिंह ने जब जम्मू कश्मीर का भारत में विलय किया तो यहां का कुल क्षेत्रफल 2.24 लाख स्क्वायर किलोमीटर था, जो वर्तमान में केवल एक लाख स्क्वायर किलोमीटर रह गया है।

उन्होंने कहा नेहरू की कार्यशैली से महाराजा हरि सिंह भी खासे नाराज हुए और उन्होंने जम्मू कश्मीर में दोबारा कभी न आने का संकल्प लिया और मुंबई में बस गए और वहां आखिरी सांस भी ली।
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'गिलगिट-बाल्टिस्तान में फहराएंगे तिरंगा'

कार्यक्रम में मौजूदा भाजपा के वरिष्ठ नेता - फोटो : Amar Ujala
इसके साथ ही उन्होंने दोबारा अपने बयान को दोहराते हुए तिरंगे झंडे को गिलगिट बाल्टिस्तान और मीरपुर तक ले जाने की बात कही।

उन्होंने पंडित प्रेमनाथ डोगरा के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि प्रजा परिषद के आंदोलन में देश भक्ति के साथ मर्यादा भी थी।

आजादी 70 कार्यक्रमों की शृंखला के तहत स्वतंत्रता सेनानी एवं प्रजा परिषद और जन संघ के पूर्व प्रधान पंडित प्रेमनाथ डोगरा के जन्म स्थल समैलपुर में जनसभा का आयोजन किया गया था। जिसमें केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, वित्त मंत्री अरुण जेटली, रियासत के डिप्टी सीएम डॉ. निर्मल सिंह आदि मौजूद रहे।
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