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केंद्रीय मंत्री ने कहा- 'कश्मीरियत, जम्हूरियत से पहले भारतीयता पर होगी बात'

Sat, 10 Sep 2016 01:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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ज‌ितेंद्र स‌िंह - फोटो : File Photo
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दो महीने से कश्मीर में हालात खराब हैं। कश्मीर में कश्मीरियत, जम्हूरियत की तो बात बहुत की जा रही है, लेकिन सबसे पहले भारतीयता की बात होनी चाहिए।
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जब भारतीयता से हटकर बात की जाती है, तो विवाद पैदा होता है। यह बातें शुक्रवार को पीएमओ में केंद्रीय राज्यमंत्री डा. जितेंद्र सिंह ने आनंद नगर बोहड़ी में आयोजित संजीवनी शारदा केंद्र के स्थापना दिवस में कार्यक्रम में कही। 

डा. जितेंद्र सिंह कार्यक्रम में मुख्य मेहमान के रूप में मौजूद थे। सबसे पहले उन्होंने हवन यज्ञ में आहुति डाली। कार्यक्रम के आरंभ में डा. केएन पंडिता द्वारा लिखी गई पुस्तक कश्मीरी सारस्वत ब्राह्मण नाम की पुस्तक का विमोचन किया। इसके बाद रेडियो शारदा के निदेशक को शारदा पुरस्कार के साथ सम्मानित किया गया।
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'बुरहान को मारने में सुरक्षा बलों ने की थी काफी मेहनत'

डॉ. जितेंद्र सिंह - फोटो : Amar Ujala
डा. जितेंद्र सिंह नेे संबोधित करते हुए कहा कि आज कश्मीरी पंडित समाज राष्ट्रवादी समाज बन चुका है।

पिछले 26 वर्ष में कश्मीरी पंडित समाज की अलग पहचान बन चुकी है और 26 वर्ष से ही कश्मीरी पंडित चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने आतंकवादी की मौत पर बयानबाजी करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा की आतंकी को मारने व पता लगाने का काम सुरक्षा बलों का है।

विश्व के सबसे बेहतर सुरक्षा बल भारत के हैं। कश्मीर में आतंकवादियों के खिलाफ अभियान छेड़ने का अधिकार सुरक्षा बलों का ही है। आतंकी बुरहान को मारने के आपरेशन में सुरक्षा बलों ने बहुत मेहनत की थी। 
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कश्मीरी पंडितों के लिए योजनाओं पर तेजी से चल रहा काम

गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ जितेंद्र सिंह - फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि पहली बार दुनिया के इतिहास में ऐसा कोई घटनाक्रम चला है, जिसमें जितने लोग घायल हुए हैं, उतने ही सुरक्षाबल घायल हैं। यह सब सैनिकों पर पाबंदी का नतीजा है। बहुत सारी घटनाओं में सामने आया है, जहां एक सैनिक ने दूसरे सैनिक को गोली चलाने से रोका है, क्योंकि सैनिकों को उन पर ही कार्रवाई होने का डर है।

दो महीने के घटना क्रम में 6000 लोग घायल हुए हैं और इतने ही सुरक्षा बल भी घायल हुए हैं। अपना फर्ज निभाते हुए सैनिक घायल हो रहे हैं। सैनिक क्यों मार खा रहा है यह हम सबको समझना होगा। 

सर्वदलीय समिति के राज्य में पहुंचने पर श्रीनगर में 45 प्रतिनिधिमंडल मिले और जम्मू में 20 प्रतिनिधिमंड मिले। दिल्ली लौटने पर समिति का एक भी सदस्य यह नहीं कह सका की जम्मू कश्मीर को लेकर विवाद है और पाकिस्तान के साथ बात करनी चाहिए। चंद लोगों ने इसका बहिष्कार किया तो कहा जाने लगा की सर्वदलीय समिति का आना बेकार हो गया।

डा. जितेंद्र सिंह ने कहा ही कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को जम्मू में एडजस्ट करने और इनको वेतन जारी करने को लेकर केंद्र सरकार विचार विमर्श कर रही है। राज्य सरकार के साथ भी बातचीत चल रही है। उम्मीद है कि जल्द इनकी समस्या को हल किया जाएगा। इस मौके पर भाजपा के आर्गेनाइजेशन सेक्रेटरी अशोक कौल, आनंद पवामी प्राण नाथ भट, स्वामी कुमार आदि मौजूद थे। 
  
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