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कल कार्तिक शुक्ल एकादशी व्रत वाले दिन होगा तुलसी विवाह

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जम्मू। कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक भगवान विष्णु की सबसे प्रिय तुलसी का विवाह भगवान शालीग्राम से एवं विवाह नक्षत्र काल में ही करने का शास्त्र विधान हैं। कार्तिक शुक्ल एकादशी व्रत वाले दिन प्रदोष काल में तुलसी विवाह एवं पूजन करने का विधान हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की हरिप्रबोधिनी एकादशी व्रत स्मार्त संप्रदाय (सामान्य गृहस्थी) के अनुसार इस साल 25 नवंबर बुधवार को रखें और वहीं वैष्णव संप्रदाय के लोग 26 नवंबर गुरुवार को हरिप्रबोधिनी एकादशी का व्रत रखें। इस दिन तुलसी के पौधे को सजाकर उसके चारों तरफ गन्ने का मंडप बनाना चाहिए। तुलसी जी के पौधे पर चुनरी या ओढ़नी चढ़ानी चाहिए। तुलसी पूजन करते समय  (ऊं तुलस्यै नम:) मंत्र जाप करें,दूसरे  दिन पुन: तुलसी जी और विष्णु जी की पूजा कर,ब्राह्मण को भोजन करवा कर यजमान खुद भोजन कर व्रत का पारण करना चाहिए। भोजन के पश्चात तुलसी के स्वत: गलकर या टूटकर गिरे हुए पत्तों को खाना शुभ होता है। इस दिन गन्ना, आंवला और बेर का फल खाने से जातक के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं।महंत रोहित शास्त्री ने कहा कि कन्या के विवाह में अगर विलंब हो रहा हो अग्नि कोण में तुलसी लगा कर कन्या रोज पूजन करे तो विवाह जल्दी अनुकूल स्थान पर होगा।
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