हेरोइन (प्रसिद्ध नाम चिट्टा) की लत ने शहर के युवा वर्ग को जकड़ लिया है। शहर के बड़े स्कूल, कोचिंग सेंटर, कालेज और निजी शिक्षण संस्थानों तक हेरोइन पहुंचाई जा रही है।
इनमें वे संस्थान निशाने पर हैं, जहां बड़े घरों के बच्चे पढ़ते हैं, ताकि बड़ी कमाई हो। इसके लिए बाइक, व्हाट्एसएप का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले एक हफ्ते में चार तस्कर पकड़े गए।
इनके खुलासा हुआ कि नशा विद्यार्थियों तक पहुंचाना था। ड्रग एडिक्शन सेंटर में हर रोज 15 से 20 नए मामले आ रहे हैं। इसमें हेरोइन के सबसे अधिक हैं। हर रोज 150 पंजीकृत (नशे की लत लगा चुके) मरीजों की जांच सेंटर में हो रही है।
महिलाएं भी इसकी शिकार हो रही हैं। ड्रग एडिक्शन सेंटर में दो साल में हेरोइन का नशा करने वालों में युवतियों की मात्रा शून्य से पांच फीसदी हो गई है। डा. मनु अरोड़ा का कहना है कि तेजी से हेरोइन का नशा करने वालों की संख्या बढ़ रही है।
चिट्टा(हेरोइन) शहर में सबसे अधिक बिक रहा है। इसकी तीन क्वालिटी हैं। सफेद पाउडर, सख्त (गुड़ की तरह) और एक अन्य किस्म है। इसके अलावा ब्राउन शूगर, गांजा, अफीम, कोकीन, पाउडर शामिल है।
सिल्वर पेपर पर हेरोइन को डाला जाता है। इसके नीचे धीमी आंच से इसको पिघलाया जाता है। इसके बाद यह पूरे पेपर पर फैल जाता है। पेपर को गोल करके इसके साथ चिपका कर इनहेल किया जाता है। हेरोइन को छोटे बड़े शाट बनाकर बेचे जाते हैं।