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Jammu News: भर्ती नियम न बनने से गैर राजपत्रित चिकित्सा कर्मी पशोपेश में

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जम्मू-कश्मीर के पांच नए जीएमसी में वेतन विसंगतियां भी दूर करने की मांग
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश के पांच नए मेडिकल काॅलेजों में भर्ती नियम लागू न होने से गैर राजपत्रित चिकित्सा कर्मचारी पशोपेश में हैं। नियम न बनने से उनके लिए पदोन्नति के रास्ते बंद हैं। चिकित्सा कर्मचारियों ने पुराने व नए मेडिकल कालेजों में वेतन विसंगतियों को भी दूर करने की मांग की है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में लद्दाख की तरह यूटी स्तरीय लाभ देने की मांग की है।
ऑल इंडिया रजिस्टर्ड नर्सेज फेडरेशन के प्रधान विश्व शर्मा ने बताया कि अक्तूबर, 2017 में कैबिनेट के एक आदेश में पांच नए मेडिकल काॅलेजों के लिए 3375 पद सृजित किए गए। स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग ने जीएमसी कठुआ, राजोरी, डोडा, बारामुला और अनंतनाग के लिए 675 पद अधिसूचित किए। 2019 में परीक्षाएं लेने के बाद दिसंबर 2020 में नए मेडिकल काॅलेजों में गैर राजपत्रित चिकित्सा कर्मचारियों की तैनाती की गई। लेकिन, भर्ती नियम जारी नहीं किए गए।
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कर्मचारियों के संशोधित वेतन के मुद्दे को लेकर एक समिति ने वित्त विभाग को अक्तूबर 2021 में प्रस्ताव दिया। जून 2024 में भर्ती नियमों के लिए समिति का पुनर्गठन किया गया। लेकिन, पांच साल बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि तीन साल बाद वे पदोन्नति के लिए योग्य हो जाते हैं। इसी तरह जीएमसी उधमपुर और हंदबाड़ा में भी भर्ती नियम न होने से पद विज्ञापित नहीं हो पा रहे हैं।
यह समस्या राजपत्रित अधिकारियों और कर्मचारियों को भी पेश आ रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में स्किम्स सौरा, जीएमसी जम्मू/श्रीनगर और नए मेडिकल काॅलेजों में वेतन अलग-अलग है। लद्दाख में कर्मचारियों को नर्सिंग और वर्दी भत्ता भी दिया जा रहा है, जिससे उनके और जम्मू-कश्मीर के नए मेडिकल कालेजों के कर्मचारियों में 12 हजार रुपये तक का अंतर है। फेडरेशन ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से हस्तक्षेप कर चिकित्सा कर्मचारियों के लिए भर्ती नियम बनाने और वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग की।
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नए मेडिकल काॅलेजों में गैर राजपत्रित कर्मचारियों के भर्ती नियमों को लेकर काम चल रहा है। इसके लिए नियमित रूप से बैठकें की जा रही हैं। उम्मीद है जल्द भर्ती नियम बन जाएंगे।
डाॅ. सुरेंद्र अत्री, प्रिंसिपल, जीएमसी कठुआ
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