- सेवानिवृत शारीरिक शिक्षक की स्पोर्ट्स अकादमी बनी मिसाल
- राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी हैं 30 से ज्यादा लड़कियां
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। संभाग के डोडा जैसे दूरदराज के इलाके की बेटियां आज खेलों में परचम लहरा रही हैं। ये मुमकिन हो पाया है एक सेवानिवृत शारीरिक शिक्षक की लगन और मेहनत से, जिन्होंने न सिर्फ एक स्पोर्ट्स अकादमी शुरू की, बल्कि लड़कियों को उनके सपनों की उड़ान दी।
अब तक इस अकादमी की 30 से ज्यादा बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर अपनी काबिलियत दिखा चुकी हैं। बेटियों के जज्बे और कोच की निष्ठा को देखते हुए अब जिला प्रशासन भी इस पहल में अपना सहयोग दे रहा है।
यह कहानी है डोडा के रहने वाले भारत भूषण चंदेल की है। उन्होंने बताया कि साल 2017 में वे गर्ल्स हायर सेकंड्री स्कूल डोडा के शारीरिक शिक्षक के पद से रिटायर हुए। इसके बाद वो एक निजी स्कूल से जुड़ गए। यहां उन्होंने लड़कियों को क्रिकेट की ट्रेनिंग देनी शुरू की।
2022 में उन्होंने डोडा में एक मैदान किराये पर लेकर ''द्रोणाचार्य चिनाब स्पोर्ट्स अकादमी'' के नाम से अपनी अकादमी शुरू की। अकादमी लड़कियों के लिए ही शुरू की गई थी, बाद में लड़कों को भी ट्रेनिंग दी जाने लगी। क्रिकेट के बाद शूटिंग, बास्केटबॉल, बॉक्सिंग और तीरंदाजी भी सिखाई जाने लगी।
-
क्रिकेट, बॉक्सिंग और शूटिंग में कमाल दिखा रहीं बेटियां
भारत भूषण ने बताया कि उनकी अकादमी की 30 से ज्यादा बेटियां राष्ट्रीय स्तर पर अपनी काबिलियत दिखा चुकी हैं। छह लड़कियां राष्ट्रीय अंडर-15 क्रिकेट टूर्नामेंट, दो राष्ट्रीय अंडर-19 क्रिकेट टूर्नामेंट, नौ जम्मू-कश्मीर क्रिकेट काउंसिल की टीम में और दो लड़कियां आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी क्रिकेट टूर्नामेंट में खेल चुकीं हैं। इसके अलावा दो लड़कियां राष्ट्रीय स्तर पर शूटिंग, तीन बॉक्सिंग और दो बास्केटबॉल प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी हैं। प्रशासन की ओर से भी अकादमी को सहयोग मिल रहा है। प्रशासन ने उन्हें शहर में मैदान भी उपलब्ध कराया है।
मोबाइल का सीमित उपयोग जरूरी
भारत भूषण बताते हैं कि उन्होंने अपनी अकादमी में लड़के और लड़कियों के मोबाइल के कम से कम इस्तेमाल पर जोर दिया। इससे उनको खेलने के लिए ज्यादा समय मिला। लड़कियों की सफलता के पीछे यह एक बड़ा कारण है। खेलने वाले युवाओं को मोबाइल का इस्तेमाल कम से कम ही करना चाहिए।