कागज के लिफाफे बनाने से शुरू किया सफर, आज रोजाना कर रहीं सौ लीटर दूध का कारोबार
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। कुछ लोग हालातों के सामने घुटने टोक देते हैं, तो कुछ मेहनत से हालात ही बदल देते हैं। यह बात बिश्नाह के सुल्तानपुर निवासी रहने वाली शीतल कुमारी पर सटीक बैठती है। शीतल ने बुरे समय में हिम्मत से हालातों का सामना किया। कागज के लिफाफे बनाने से शुरू किया सफर आज् आज लखपति दीदी तक पहुंच गया है। वह रोजाना 100 लीटर दूध का कारोबार कर रही हैं।
इससे वह आज अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनीं। शीतल अपने संघर्ष की कहानी को साझा करते हुए कहती हैं कि आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण रद्दी के कागज लेकर उनके लिफाफे बनाने का काम शुरू किया था। फिर 2014 में सरकार की उम्मीद योजना के साथ जुड़कर सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाया। इसके बाद ऑटोमेटिक मिल्क कलेक्शन सेंटर शुरु किया। पहले तो केवल दूध का ही व्यापार किया। फिर ट्रेनिंग लेकर दूध उत्पादों के निर्माण जैसे पनीर,कलाड़ी,घी आदी का काम की शुरूआत की।
2012 में मिशन शक्ति से जुड़ीं और 35 महिलाओं को रोजगार दिया
शीतल बताती हैं कि 2021 में मिशन शक्ति का साथ पाकर जूट उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लिया और 35 महिलाओं को साथ जोड़ा। उन्हें भी रोजगार कमाने का अवसर दिया। विभिन्न जगहों पर जाकर मिशन शक्ति के तहत महिलाओं के सरकारी स्कीम के बारे में बताती हैं और खुद का काम खोलकर आर्थिक रूप से सशक्त होने के लिए भी प्रेरित करती हैं।
जूट व मशरूम उत्पादन के लिए 35 अन्य महिलाओं को जोड़ा जूट व डेयरी के काम के साथ मशरूम उत्पादन के लिए भी 35 अन्य महिलाओं के साथ जोड़ा है। शीतल के मुताबिक रोजोना 100 किलो दूध का कारोबार करती हैं। शीतल का कहना है कि खुद तो लखपति दीदी बन चुकी हैं अब अन्य महिलाओं का लखपति दीदी बनने का सपना साकार करने में मदद कर रही हैं।