मशहूर लेखक एवं गीतकार गुलजार भी डोगरी संस्कृति के दीवाने हैं। वह अक्सर डोगरी गाने सुनते हैं। मंगलवार को जम्मू विश्वविद्यालय के गोल्डन जुबली समारोह के तहत आयोजित जश्न-ए-गुलजार कार्यक्रम में गुलजार ने डोगरी की तारीफ में कसीदे पढ़े।
गुलजार ने कहा कहा कि वह अक्सर डोगरी गाने सुनते हैं। डोगरी बहुत मीठी जुबान है। अगर मुझे डोगरी आती तो मैं डोगरी में जरूरत लिखता। उन्होंने अपनी कुछ रचनाएं भी पेश कीं। कार्यक्रम में खुशबीर सिंह शाद, मुकेश आलम, आदिल फरहत, जीवन शर्मा, धर्मेश नरगोत्रा आदि कविताएं पढ़ीं।
तीन दिवसीय जश्न-ए-गुलजार कार्यक्रम का उद्घाटन राज्यपाल के सलाहकार खुर्शीद अहमद गनेई ने किया। यह आयोजन उर्दू विभाग और जम्मू विश्वविद्यालय के डीन स्टूडेंट वेलफेयर ने मिलकर किया है। गनेई ने कहा कि गुलजार ने बॉलीवुड फिल्मों आंधी, मौसम, परिचय, मेरे अपने, माचिस आदि फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं। गुलजार गंगा यमुना तहजीब की सबसे बड़ी मिसाल हैं। वह कई सरकारी संस्थाओं से जुडे़ हैं और महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
गनई ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से नवोदित लेखकों और कवियों को साहित्य की दुनिया में अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलता है। उन्होंने उर्दू के प्रचार प्रचार की भी जरूरत बताई। कार्यक्रम में कुलपति प्रो. मनोज कुमार धर, कनाडा के उर्दू लेखक डॉ. ताकी अबेदी, उर्दू विभाग के एचओडी प्रो. शोएब इनायत मलिक, डीन स्टूडेंट वेलफेयर प्रो. एसएस जमवाल, सूचना विभाग के निदेशक गुलजार अहमद धर, रजिस्ट्रार डा. मीनाक्षी किलम समेत साहित्यकार, कवि, बुद्धिजीवी और साहित्य से जुड़े लोग मौजूद रहे।