तनाव के बीच रेलवे ने चलाईं सात विशेष ट्रेनें, रोजाना 13 सौ से 15 सौ यात्रियों ने किया सफर
- रेलवे की टीम ने 18-18 घंटे तक दी सेवाएं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण माहौल में प्रदेश में रहने वाले प्रवासियों के लिए रेल सहारा बनी। उड़ानें रद्द होने और यात्री वाहन कम चलने से लोगों को घर वापसी में परेशानी हुई, लेकिन रेलवे ने यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया।
नौ से 11 मई तक जम्मू रेलवे स्टेशन से 80 हजार से अधिक प्रवासियों ने सफर किया। इनके लिए रेलवे ने नियमित के साथ सात विशेष ट्रेनें चलाईं, जिनमें भी रोजाना 13 सौ से 15 सौ यात्रियों ने सफर किया। तनावपूर्ण माहौल में नए जम्मू रेलवे डिविजन के कर्मचारियों के लिए काम करना काफी चुनौतीपूर्ण था।
विशेष ट्रेनों के लिए रेलवे बोर्ड से मंजूरी लेने, ट्रेन के रखरखाव से लेकर तय शेड्यूल के बीच विशेष ट्रेन चलाना अधिकारियों के लिए चुनौती भरा रहा। इस चुनौती के बीच रेलवे अधिकारियों व कर्मचारियों ने 18-18 घंटे तक काम किया। आठ मई की रात को पाकिस्तानी सेना ने ड्रोन से जम्मू पर पहला हमला किया। इसी डर के बीच नौ मई से प्रवासी श्रमिकों का जम्मू से अपने घरों को लौटने का सिलसिला शुरू हुआ।
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जम्मू और उधमपुर से तीन विशेष ट्रेनें चलाई
जम्मू रेलवे स्टेशन से इस दौरान 32 हजार से अधिक यात्रियों को गंतव्य की तरफ भेजा गया। जम्मू और उधमपुर से तीन विशेष ट्रेनें चलाईं। प्रति ट्रेन से औसतन 12 सौ से 1300 यात्रियों को भेजा गया। शनिवार को पाकिस्तान ने जम्मू शहर को निशाना बनाया। इससे तनाव और बढ़ गया। इस दिन करीब 29 हजार लोगों अपने घरों को लौटे। 11 मई को भी स्थिति में थोड़ा सुधार हुआ। लगभग 20 हजार यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया। इन दो दिनों में भी विशेष ट्रेनों से यात्री अपने गंतव्य को रवाना हुए।
तनाव के बीच ट्रेन चलाना चुनौतीपूर्ण रहा। जम्मू रेलवे स्टेशन से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया। रेलवे बोर्ड से ट्रेन परिचालन की मंजूरी ली गई। कर्मियों ने भी चौबीस घंटे सेवाएं देकर अपने काम को सही ढंग से अंजाम दिया। हमने नियमित ट्रेनों के साथ विशेष ट्रेनों का परिचालन किया।
-उचित सिंघल, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, जम्मू मंडल