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राजोरी: जब धमाके और गोलियों की तड़तड़ाहट से सहम उठे धर्रा और नीली निवासी, अनिष्ट की आशंका से दहशत में बीती रात

Sat, 07 Oct 2023 05:21 AM IST
दुष्यंत शर्मा रवि वर्मा, राजोरी

सार

नीली चौकी स्थित सैन्य शिविर में फायरिंग और ग्रेनेड के धमाकों के बाद इलाके में दहशत का माहौल था। रात को अचानक सेना ने लोगों को गांव खाली करने के लिए कह दिया। लोगों के सामने संकट इस बात का था कि इस मौसम में रात कहां गुजारें।
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Rajouri file pic - फोटो : रवि वर्मा
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विस्तार
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थन्नामंडी के धर्रा और नीली क्षेत्र में बृहस्पतिवार की रात दहशत के साए में बीती। नीली चौकी स्थित सैन्य शिविर में फायरिंग और ग्रेनेड के धमाकों के बाद इलाके में दहशत का माहौल था। रात को अचानक सेना ने लोगों को गांव खाली करने के लिए कह दिया। लोगों के सामने संकट इस बात का था कि इस मौसम में रात कहां गुजारें। आनन-फानन में लोगों ने रात काटने के लिए सगे-संबंधियों, रिश्तेदारों और दोस्तों के घर शरण ली और अनिष्ट की आशंका से शुक्रवार सुबह रोशनी होने तक वहीं दुबके रहे।

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यह हालात तब बने जब वीरवार को मेजर रैंक के एक अधिकारी ने अपने ही साथियों पर फायरिंग कर दी और शस्त्रागार में जा छिपा। वह कहीं शस्त्रागार को नुकसान न पहुंचाए, इस अंदेशे के चलते सेना ने शस्त्रागार के नजदीक के गांव को खाली कराया था। हालांकि लोगों को इस बात की जानकारी नहीं थी कि आखिर हुआ क्या है।

ऐसा लगा कि आतंकी हमला हुआ है
नाम न छापने की शर्त पर धर्रा के एक सरकारी कर्मचारी ने बताया कि वीरवार को दिन में फायरिंग की आवाज सुनकर उन्हें लगा कि आतंकी हमला हुआ है। देर शाम तक लोग डर के मारे घरों में दुबके रहे। रुक-रुककर गोलियों की तड़तड़ाहट और ग्रेनेड के धमाके से पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना रहा। रात को जब सेना ने उन्हें घर खाली कर किसी सुरक्षित स्थान पर जाने की बात कही तो मानों पैरों तले जमीन खिसक गई हो। घरों में कीमती सामान, खाने-पीने की चीजें, कपड़े आदि सब कुछ छोड़-छाड़ लोग रात बिताने के लिए ठिकाना ढूंढने में लग गए, सांसें हलक में अटकी रहीं।
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ऐसा लगा कि रात को ही घर उड़ा दिए जाएंगे
धर्रा के एक अन्य निवासी ने बताया कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी कि सेना ने घर खाली क्यों करवाए। उधर, सेना के कैंप के अंदर रुक-रुककर गोलाबारी और धमाके हो रहे थे, लेकिन कौन कर रहा है, यह भी नहीं पता था। बताया कि जब थन्नामंडी में आतंकवाद चरम पर था तो उन दिनों में भी इतनी डरावनी रात नहीं देखी।

आधी रात तक तो यह महसूस हो रहा था कि शायद उनके घरों को ही रात को उड़ा दिया जाएगा, लेकिन रात करीब एक बजे के बाद जब गोलाबारी बंद हुई तो लोगों को कुछ राहत मिली। सगे-संबंधियों, दोस्तों और परिजनों के जहां भी जागकर रात बिताने वाले कुछ अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें सेना पर पूरा भरोसा है। सेना हर मुश्किल काम में उनकी मदद करती है, लेकिन वीरवार को जो मंजर यहां बना उससे काफी घबरा गए थे। 

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