रिहायशी इलाकों में ठिकाने बनाने से हो रहा था नुकसान, 70 से 80 डिग्री पहाड़ों में छिप रहे
आतंकियों ने पहले राजोरी-पुंछ और अब कोकरनाग में इसी रणनीति से सेना को पहुंचाया नुकसान
अजय मीनिया
जम्मू। सीमा पार से घुसपैठ करके आने वाले आतंकियों ने पनाह लेने की रणनीति बदल दी है। यह आतंकी अब रिहायशी इलाकों की जगह पहाड़ी क्षेत्रों में मौजूद गुफाओं का सहारा ले रहे हैं। 70 से 80 डिग्री वाले ऊंचाई वाले पहाड़ों में छिपकर आतंकी वारदातें कर रहे हैं, ताकि सेना को ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके।
आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए गुफाओं से बाहर निकलते हैं और फिर वहीं छिप जाते हैं। इनके लिए यह गुफाएं स्थानीय ओजी वर्कर तलाश रहे हैं। इन गुफाओं में कैसे रहना है, इसके लिए आतंकियों को पाकिस्तान से बाकायदा प्रशिक्षण देकर भेजा जा रहा है। इन गुफाओं में रहने के लिए आतंकियों को विशेष कपड़े, जूते, हाथों में पहनने वाले दस्ताने, एक बार खाने पर महीने तक भूख न लगने वाले चाकलेट, दवाइयां देकर भेजा रहा है। सभी चीजों का कब कैसे और कहां इस्तेमाल करना है, इसके लिए एलओसी के नजदीक पाकिस्तानी सेना के कैंपों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो पीर पंजाल की पहाड़ियों में छिपे आतंकी ऐसा ही कर रहे हैं। राजोरी, पुंछ, रियासी और अब अनंतनाग के कोकरनाग में भी आतंकी भी गुफाओं का सहारा ले रहे हैं।
जानबूझ कर खींच रहे लंबा ऑपरेशन
आतंंकियों ने अपनी रणनीति बदली है। राजोरी-पुंछ में भी उन्होंने वैसा ही किया। घने जंगलों और गुफाओं में ठिकाने बनाए। वह जानबूझ कर ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि रिहायशी इलाकोें में ठिकाना बनाने से वह जब घेरे जा रहे थे तो उन्हें बाहर निकलना मुश्किल हो रहा था। इसलिए अब उन्होंने रणनीति बदली है। वह जानबूझ कर सेना को इस तरह की जगहों में मुठभेड़ के लिए उकसा रहे है, ताकि नुकसान ज्यादा हो। वह लोग कई दिनों तक मुठभेड़ को लंबा खींच रहे हैं, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में उपस्थिति दर्ज करा सकें। लंबा ऑपरेशन चलाकर वहां से भाग जाने की फिराक में हैं।
- एसपी वैद, पूर्व डीजीपी
8 हजार फुट की ऊंचाई पर जहांगीर का ठिकाना
बता दें कि किश्तवाड़ के कुख्यात आतंकी जहांगीर सरूरी ने भी अपने लिए कुछ इसी तरह का ठिकाना किश्तवाड़ में 8 हजार फुट की ऊंचाई पर जंगल में बना रखा था। कुछ ही दिन पहले सेना और पुलिस ने मिलकर सरूरी के इस ठिकाने का पता लगाया था।