एम्स की तर्ज पर रेशमघर स्थित सुपर स्पेशलिटी अस्पताल से बुनियादी सुविधाएं गायब हैं। न कैंटीन, न दवाइयों की दुकानें और न ही इंटरकाम फोन की सुविधा। यहां तक की सुविधाओं के लिए मरीजों के साथ स्टाफ को इंतजार करना पड़ रहा है। पीपीपी मोड के तहत कुछ नए निर्माण के लिए पिछले साल अस्पताल में पहले से ही बेसमेंट में निर्माणाधीन कैंटीन ढांचे को तोड़ दिया गया था।
इसके बाद कैंटीन को लेकर कुछ खास नहीं हो पाया है। अस्पताल में नेफरोलाजी, यूरोलाजी, सीटीवीएस, कार्डियोलाजी, न्यूरोसर्जरी, गेस्ट्रोलाजी यूनिट में ओपीडी के अलावा मरीजों को इंडोर वार्ड में इलाज दिया जा रहा है, लेकिन मूलभूत सुविधाएं न होने से स्टाफ के साथ मरीजों और तीमारदारों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।
वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद ने सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का उद्घाटन किया था। इस प्रोजेक्ट को सीपीडब्ल्यूडी (सेंटर पब्लिक वर्क डिपार्टमेंट) विभाग ने 17 फरवरी 2008 को शुरू किया था, लेकिन 18 माह में पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट को 2013 में करीब 64 महीनों बाद चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा सका।