प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट तेज हो गई है। आगामी 16 अक्तूबर को प्रदेश सरकार के दो साल का कार्यकाल पूरा होगा और इससे पहले मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर श्रीनगर में अगले हफ्ते अहम बैठक की संभावना है। बैठक के लिए 10 अक्तूबर के आसपास का समय तय है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल में विस्तार करते हैं तो इसके लिए मौजूदा मंत्रियों के विभागों से कटौती होना तय है। इसके अलावा पार्टी की बैठकों में जिन मंत्रियों के कामकाज को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनकी समीक्षा लगातार हो रही है।
ऐसे में मौजूदा मंत्रियों के फेरबदल पर भी संशय बरकरार है। कई पुराने चेहरे बीते दो साल से लगातार मंत्रिमंडल में दाखिल होने का इंतजार कर रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बीते कुछ समय से मंत्रिमंडल विस्तार को लगातार टालते रहे हैं। इसके लिए पहले दिल्ली के जंतर-मंतर में हुए प्रदर्शन के आसपास की तारीख तय की गई थी, लेकिन विस्तार नहीं हो पाया।
विपक्ष मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सरकार पर लगातार हमलावर रहा है और मंत्रिमंडल विस्तार के साथ ही सरकार के विधायकों में फूट की बात कही जा रही है। फिलहाल, मंत्रिमंडल विस्तार अब मुहाने पर है और मुख्यमंत्री इसे लेकर कभी भी अंतिम फैसला कर सकते हैं।
प्रदेश में मंत्रिमंडल में मुख्यमंत्री समेत कुल नौ मंत्री हो सकते हैं। अभी तक तीन सीटें खाली हैं। इसके अलावा विधानसभा उपाध्यक्ष का पद भी दो साल से नहीं भरा गया है। मुख्यमंत्री के पास इस समय कुल चार पदों को भरने का अवसर है। लेकिन इन पदों के लिए दावेदारों की फेहरिस्त लंबी है। वरिष्ठ विधायक विधानसभा सत्र के दौरान भी सदन में अपनी-अपनी पुख्ता दावेदारी पेश कर चुके हैं।
बहरहाल, अब देखना यह है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल विस्तार करते हैं तो इसमें कौन से चेहरे शामिल होंगे और इनका मौजूदा मंत्रियों पर क्या असर देखने को मिलेगा। अगर विभागों में कटौती होती है तो मौजूदा मंत्री कौन से विभाग गंवाने पड़ते हैं और फेरबदल होता है तो इसका जम्मू और कश्मीर संभाग पर क्या असर पड़ेगा। इस समय मुख्यमंत्री समेत तीन मंत्री कश्मीर से तो उपमुख्यमंत्री समेत तीन मंत्री जम्मू संभाग से हैं।