फर्जी स्थायी निवासी प्रमाणपत्र (पीआरसी) बनवाकर सरकारी लाभ उठाने के मामले में क्राइम ब्रांच की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 13 साल की जांच के बाद चार लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट पेश की है।
आरोप है कि पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी परिवार ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से जनगणना रिकॉर्ड और पारिवारिक वंशावली में हेराफेरी कर पीआरसी हासिल किए। इन्हीं प्रमाणपत्रों के आधार पर एक बेटे ने सरकारी नौकरी हासिल की, जबकि दूसरा दो बार सरपंच चुना गया।
ईओडब्ल्यू ने चार्जशीट जम्मू की एंटी करप्शन कोर्ट में दाखिल की है। मामला वर्ष 2013 में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, सियालकोट निवासी लखन सिंह पश्चिमी पाकिस्तानी शरणार्थी थे। पंजाब से जम्मू आने के बाद उन्होंने कथित तौर पर गलत दस्तावेजों के आधार पर अपने और परिवार के सदस्यों के पीआरसी बनवाए।
\जांच में सामने आया कि लखन सिंह के बेटे प्रेम सिंह ने पीआरसी के आधार पर एस्टेट विभाग में सरकारी नौकरी हासिल की। वहीं, दूसरे बेटे प्रभाकर सिंह ने इसी प्रमाणपत्र के आधार पर सरपंच का चुनाव लड़ा और दो बार इस पद पर चुने गए। मामले की जांच डीएसपी फैसल आरिफ रिशू के नेतृत्व में की गई।
दो आरोपियों की हो चुकी है मौत
मामले में लखन सिंह और तत्कालीन तहसीलदार सतपाल गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया था, लेकिन दोनों की मौत हो चुकी है। प्रेम सिंह एस्टेट विभाग से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि प्रभाकर सिंह पूर्व सरपंच हैं। अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले में न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।