जोड़ों के दर्द से परेशान यानी रियुमैटाइड अर्थराइटिस से ग्रस्त लोगों के लिए गुड न्यूज है। सीएसआईआर की सहयोगी संस्था इंडियन इंस्टीट्यूट आफ इंटिग्रेटिव मेडिसिन (आईआईआईएम) ने इस रोग के लिए एक ऐसी अचूक दवा खोजी है, जिससे जोड़ों का दर्द छूमंतर हो जाएगा।
इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने ऊंचे पहाड़ी इलाकों में पाए जाने वाले पाषाणभेद (बर्गेनिया सिलिआटा) नामक पौधे से इस रोग की दवा को खोजने में सफलता पाई है। यह पौधा अब तक किडनी, मूत्र थैली की पथरी को निकालने, पाइल्स, लिकोरिया और सांस संबंधी तकलीफों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है।
पौधे के औषधीय गुणों को ध्यान में रखते हुए यहां के वैज्ञानिकों ने शोध किया तो पाया कि यह रियुमैटाइड अर्थराइटिस में भी काफी सफल रहा। वैज्ञानिकों ने इस पौधे के केमिकल को चूहे पर प्रयोग कर देखा। इसमें पाया गया कि यह काफी कारगर रहा।
इंस्टीट्यूट के निदेशक डा. राम विश्वकर्मा का कहना है कि लगभग तीन साल के प्रयोगशाला तथा चूहे पर किए गए प्रयोग में यह सफल रहा है। इसके लिए पेटेंट भी दाखिल किया गया है। उन्होंने दावा किया कि यह बिना किसी दुष्परिणाम के रियुमैटाइड अर्थराइटिस में कारगर है। उन्होंने बताया कि ये पौधा किश्तवाड़ के इलाके में पाए जाते हैं।