प्रदेश में विधानसभा सत्र समाप्त होने के बाद दरबार मूव पर हलचल बढ़ गई है। विधानसभा, सिविल सचिवालय समेत सभी निदेशालय आगामी तीन हफ्तों में श्रीनगर के लिए रवाना हो सकते हैं। अप्रैल के तीसरे शुक्रवार दरबार मूव की अधिसूचना जारी होने की संभावना है। अधिसूचना जारी होने के एक हफ्ते बाद एडवांस पार्टी श्रीनगर रवाना होंगी। मई के पहले सप्ताह में सभी विभाग एकसाथ कश्मीर से कामकाज शुरू करेंगे। दरबार मूव को लेकर सामान्य प्रशासन विभाग अधिसूचना जारी करेगा।
दरबार मूव पर बीते साल 17 अक्तूबर को अधिसूचना जारी हुई थी। कश्मीर में विभागों का कामकाज एक नवंबर को बंद हो गया था। जम्मू में 3 नवंबर से कार्यालयों ने कामकाज शुरू किया था। प्रदेश में दरबार मूव की परंपरा छह माह की है। अप्रैल में दरबार मूव के छह माह पूरे हो रहे हैं। विधानसभा का अगला सत्र अब अगस्त में श्रीनगर में ही होगा। इसलिए विधानसभा को भी श्रीनगर शिफ्ट किया जाएगा। अप्रैल के बाद जम्मू में ज्यादातर विभागों में दूसरे और तीसरे दर्जे के अधिकारी रहेंगे।
ई-ऑफिस 2.0 से घटेगा दरबार मूव का बोझ : सीएम
दरबार मूव में इस बार वाहनों का इस्तेमाल बेहद सीमित होगा। सीएम उमर अब्दुल्ला ने बताया है कि सचिवालय के सभी विभागों समेत जिलास्तर पर 4061 कार्यालयों को ऑनलाइन जोड़ा गया है। ई-ऑफिस 2.0 के तहत काम हो रहा है। इस समय 1546 सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं। विभागों के ऑनलाइन काम करने से अब 2020 से पहले फाइल ढुलाई में इस्तेमाल होने वाले वाहनों का इस्तेमाल नहीं होगा। इससे सरकार पर खर्च का अतिरिक्त बोझ और सुरक्षा की चिंता कम होगी।
दरबार मूव से बढ़ा जम्मू में कारोबार
दरबार मूव के बाद जम्मू शहर में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है। व्यापार, परिवहन, होटल समेत किराये पर कमरे देने से स्थानीय लोगों को लाभ मिला है। अब दरबार के श्रीनगर जाने के बाद वहां आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ने की संभावना रहेगी। दरबार मूव के दौरान सैकड़ों कर्मचारी, अधिकारी और उनके परिवार भी स्थानांतरित होते हैं।
दरबार मूव 150 साल पुरानी परंपरा, महाराजा रणबीर सिंह ने की थी शुरुआत
जम्मू-कश्मीर में दरबार मूव की परंपरा 1872 में हुई थी। उस समय के शासक महाराजा रणबीर सिंह ने इस परंपरा को शुरू किया था। कश्मीर में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और खराब सड़क संपर्क के कारण प्रशासन चलाने में पेश आ रही दिक्कतों को खत्म करने के लिए यह कदम उठाए गए थे।
2021 में लगी रोक, 2025 में फिर बहाल
कोरोना के दौरान 2020 में दरबार मूव पर रोक लगी थी। 2021 में एलजी प्रशासन ने औपचारिक रूप से दरबार मूव को समाप्त करने का निर्णय लिया। फाइलों की ढुलाई और सुरक्षा पर करीब 200 करोड़ खर्च को रोकने के लिए यह कदम उठाने की बात कही गई थी। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने विधानसभा चुनाव से पहले दरबार मूव बहाल करने की बात कही थी जिसे पिछले साल लागू कर दिया गया।