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Jammu kashmir News : जम्मू-कश्मीर में गैर स्थानीय को मतदाता बनाने पर सियासी घमासान, केंद्र पर निशाना

Fri, 19 Aug 2022 11:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर

सार

Jammu kashmir News : पीडीपी और नेकां समेत अन्य क्षेत्रीय दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इस फैसले को केंद्र सरकार की साजिश करार दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भाजपा के लिए प्रयोगशाला बन चुका है। राज्य में बाहर से भाजपा के 25 लाख मतदाता लाए जा रहे हैं। 
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उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला - फोटो : अमर उजाला जम्मू, ग्राफिक्स
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विस्तार
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जम्मू-कश्मीर में गैर स्थानीय लोगों को मतदाता बनाने के फैसले पर सियासी घमासान शुरू हो गया है। पीडीपी और नेकां समेत अन्य क्षेत्रीय दलों ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इस फैसले को केंद्र सरकार की साजिश करार दिया है। दरअसल मुख्य चुनाव अधिकारी जम्मू-कश्मीर और लद्दाख ने मतदाता सूची को लेकर बुधवार को एक प्रेस वार्ता की थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर में मतदाता बनने के लिए डोमिसाइल होना जरूरी नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा कि जम्मू-कश्मीर भाजपा के लिए प्रयोगशाला बन चुका है। राज्य में बाहर से भाजपा के 25 लाख मतदाता लाए जा रहे हैं। यह चुनावी लोकतंत्र के ताबूत में अंतिम कील है। वहीं नेशनल कांफ्रेंस ने इस मसले पर 22 अगस्त को श्रीनगर में सर्वदलीय बैठक बुलाई है। 

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  महबूबा मुफ्ती ने कहा-भाजपा राष्ट्रहित में कुछ नहीं कर रही है, वे बस वही कर रहे हैं जो उनका लक्ष्य है। उन्होंने राष्ट्रहित को विकृत कर दिया है। धांधली अब भाजपा का हिस्सा बन चुकी है। वे इसके लिए पैसे और ताकत का इस्तेमाल कर रहे हैं। भाजपा देश को हिंदू राष्ट्र में नहीं बल्कि भाजपा राज में बदलने जा रही है। जिस तरह से अनुच्छेद 370 को असांविधानिक रूप से हटाया गया और भारतीय संविधान को विकृत किया गया। इसी तरह गैर-स्थानीय लोगों को वोट देने का उद्देश्य फर्जी चुनाव कराना है ताकि भाजपा यहां फासीवादी शासन कर सके।

वे समझ गए हैं कि जम्मू-कश्मीर में तीन साल के शासन के बाद वे मूक लोगों के प्रतिरोध को नहीं तोड़ सके।  महबूबा ने कहा, केवल मुसलमानों के लिए ही नहीं, बल्कि डोगरा, पंडित सहित हर समुदाय के लिए स्थिति अलग है। उन्होंने कहा कि भाजपा कश्मीरी पंडितों के लिए ढोल पीटने के बावजूद वोट डालने में और उन्हें सुविधा उपलब्ध कराने में विफल रही है, जिसके चलते उन्होंने अब मतदान बंद कर दिया है। देश को भाजपा की मंशा को समझना चाहिए। 2024 के चुनावों के बाद, भारत का संविधान भी हटा दिया जाएगा और भाजपा तिरंगे को भगवा ध्वज से बदल देगी क्योंकि पार्टी देश को हिंदू राष्ट्र नहीं बल्कि भाजपा राष्ट्र में बदल देगी।
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एक सवाल के जवाब में उन्होंने एकता की वकालत करते हुए कहा, इन नए हमलों के बाद हमें एकजुट होने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि चाहे हममें मतभेद हों लेकिन सभी को एड़ी चोटी का जोर लगाकर एक साथ लड़ना होगा। एक अन्य सवाल के जवाब में महबूबा ने कहा, यह वैधता के बारे में नहीं बल्कि इसके पीछे के इरादों के बारे में है। सरकार किसी नियम का पालन नहीं कर रही है।

भाजपा वास्तविक मतदाताओं के समर्थन को लेकर असुरक्षित : उमर
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री व नेशनल कांफ्रें,स उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने इस फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा जम्मू-कश्मीर के वास्तविक मतदाताओं के समर्थन को लेकर असुरक्षित है। उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट में लिखा, क्या भाजपा जम्मू-कश्मीर के वास्तविक मतदाताओं के समर्थन को लेकर इतनी असुरक्षित है कि उसे सीटें जीतने के लिए अस्थायी मतदाताओं को आयात करने की जरूरत है। जब जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने मताधिकार का प्रयोग करने का मौका दिया जाएगा तो इनमें से कोई भी चीज भाजपा की मदद नहीं करेगी। वहीं नेशनल कान्फ्रेंस ने जम्मू-कश्मीर की मतदाता सूची में बाहरी मतदाताओं को शामिल करने को तत्कालीन राज्य के लोगों का स्पष्ट रूप से डी-फ्रेंचाइजिंग करार दिया और कहा कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए मतदान करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि वे अस्थायी रूप से यहां आते हैं। 

पार्टी के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने कहा, सबसे पहले मुख्य चुनाव अधिकारी ने क्या कहा है, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है। एक सामान्य रूप से जीवित नागरिक की कसौटी क्या है। क्या पर्यटकों सहित कोई भी यहां अपना वोट दर्ज करा सकता है।

उन्होंने कहा कि लोगों में आशंकाएं हैं और सरकार को स्पष्ट करना चाहिए। उन्होंने कहा, महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में ऐसे कई राज्य हैं जहां अभी तक चुनाव नहीं हुए हैं। वे राज्य अपने लोगों को यहां भेज सकते हैं, खुद को मतदाता के रूप में पंजीकृत कर सकते हैं, फिर वोट कर सकते हैं और फिर यहां अपना पंजीकरण रद्द कर सकते हैं, जिसके बाद वे फिर से अपने राज्यों में अपना पंजीकरण कराएंगे। सुरक्षा बलों के जवानों द्वारा खुद को मतदाता के रूप में पंजीकृत कराने के मुद्दे का जिक्र करते हुए सादिक ने कहा कि नियमों के मुताबिक सुरक्षा बल शांति केंद्रों (पीस स्टेशन) में ही मतदाता के तौर पर पंजीकरण करा सकते हैं, लेकिन जम्मू और कश्मीर में सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (अफस्पा) है, जिसका अर्थ है कि जम्मू-कश्मीर को अशांत राज्य घोषित किया गया है।

इसके पीछे साजिश है : अपनी पार्टी
अपनी पार्टी के अनुसार इसके पीछे कुछ साजिश है। पार्टी के उपाध्यक्ष गुलाम हसन मीर ने कहा, इसने जम्मू-कश्मीर के लोगों में दहशत पैदा कर दी है कि इसके पीछे कोई साजिश है। अपनी पार्टी ने जम्मू-कश्मीर की ताजा मतदाता सूची में 25 लाख मतदाताओं को शामिल करने का अध्ययन करने के लिए वकीलों और विशेषज्ञों की एक टीम का गठन किया है। मीर ने आगे कहा कि सभी चीजों का अध्ययन करने के बाद अगर उन्हें पता चला कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को बेदखल किया जा रहा है, तो वे निश्चित रूप से इस मुद्दे को उचित स्तर पर उठाएंगे, लेकिन अगर अपनी पार्टी को लगा कि पूरे देश में लागू कानून के अनुसार काम हो रहा है, तो फिर ठीक हैं। मीर ने सर्वदलीय बैठक के निमंत्रण का विरोध करते हुए कहा कि पीएजीडी जम्मू-कश्मीर के युवाओं की भावनाओं का शोषण कर रहा है जिसका अपनी पार्टी विरोध करती है।

लोग जहां रहते हैं, वहां वोट का अधिकार होना चाहिए : भाजपा
  हालांकि भाजपा ने चुनाव आयोग के फैसले का समर्थन किया है। भाजपा का कहना है कि भारत एक बड़ा लोकतंत्र है और लोगों को जहां वे रहते हैं वहां वोट देने का अधिकार होना चाहिए। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा, हम चुनाव आयोग द्वारा लिए गए निर्णय का स्वागत करते हैं, हम भारत में रहते हैं और हमारे पास सबसे बड़ा लोकतंत्र है। अगर दिल्ली में वहां मजदूरी का काम करने वालों को वोट देने का अधिकार है, तो यहां काम करने वाले लोग यहां वोट क्यों नहीं दे सकते। राजनीतिक दल इससे डरते हैं, यह वे भी हैं जो 2016 में युवा थे और 18 साल के हो गए हैं और उन्हें वोट देने का अधिकार है। मौजूदा राजनीति विकास पर आधारित है और कुछ नहीं।

22 की बैठक पर नजर
अब सभी की निगाहें 22 अगस्त को डॉ. फारूक अब्दुल्ला द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक पर टिकी है। एक यह देखना कि बैठक में कौन भाग लेगा और दूसरा बैठक में क्या फैसला होगा और क्षेत्रीय दल किस तरह से इस फैसले से लड़ने जा रहे हैं।

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