वायु और ध्वनि प्रदूषण दिवाली पर कम हो, यह प्रयास थोड़े से कारगर साबित हुए है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पिछले वर्षों के रिकार्ड से तुलना करने के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि इस दिवाली पर प्रदूषण हलका कम हुआ है। अगस्त 2015 में प्रदूषण की रिकार्ड में वायु प्रदूषण सामान्य के स्तर से अधिकतम आया है।
हर वर्ष की तरह इस बार भी नरवाल स्थित बोर्ड कार्यालय, एमएएम स्टेडियम और बाड़ी ब्राह्मणा में मापक यंत्र लगाकर वायु प्रदूषण रिकार्ड किया गया, जबकि गांधीनगर गोल मार्केट, बख्शी नगर, रिहाड़ी चुंगी और परेड में ध्वनि प्रदूषण रिकार्ड दिवाली के दो दिन पहले, दिवाली और दो दिन बाद दर्ज किया गया। बताया जा रहा है कि जिंक जैसे अन्य कई घातक केमिकल पटाखों में इस्तेमाल किए जाते हैं, जो कि अस्थमा और एलर्जी के पीड़ित लोगों को परेशानी देते हैं।
नाक के जरिए शरीर में जाने वाले कण यानी सस्पेंडेंड पार्टिकुलेट मेटर (एसपीएम) और सांस के जरिए अंदर जाने वाले कण यानी रेस्पायरेबल सस्पेंडेंड पार्टिकुलेट मेटर (आरएसपीएम) की मात्रा दिवाली पर अधिक बढ़ जाती है। राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की लेबोरेटरी के डॉ. यशपाल शर्मा के मुताबिक लोगों को जागरूक करने का असर नजर आ रहा है, क्योंकि हर वर्ष प्रदूषण एकाएक कम हो रहा है।