जम्मू-कश्मीर पुलिस की राइफलों की चोरी से बचाने के लिए विभाग ने कवायद शुरू कर दी है। विभाग राइफलों के लिए चोरी से पूरी तरह सुरक्षित रैक बनवाएगा। ऐसे 120 रैक बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय का आदेश जारी किया है। हर रैक में 20 राइफलों को रखा जा सकेगा। बता दें कि बहुत बार ऐसी घटनाएं हुई हैं कि पुलिस बैरकों से हथियारों को चोरी कर लिया गया। इसमें कई मामले ऐसे भी थे जिसमें पुलिस के अपने कर्मियों ने ही हथियारों को चुरा लिया। नई व्यवस्था के बाद इन पर रोक लगेगी।
जानकारी के अनुसार यह रैक द्वि स्तरीय (टू टियर) होगा, साथ ही इसमें डबल लाॅक और एंटी थेफ्ट अलार्म डिवाइस भी होगा। डिवाइस के कारण चोरी का प्रयास होते ही अलार्म बजेगा और सभी को सावधान करेगा। इस रैक में इंसास, फिक्स बट और साइड फोल्डिंग बट वाली एके- 47, कारबाइन, एसएलआर, एम पी 5 आदि गन को रखा जा सकेगा।
इस रैक को कुछ इस तरह से तैयार किया जाएगा कि इसमें राइफलों को रखते हुए स्क्रैच भी नहीं आएगा। राइफलों को मैगजीन बाक्स के साथ रखा जा सकेगा। बताया जा रहा है कि यह रैक पहले पुलिस मुख्यालय के पास जाएंगी और इसके बाद इनको जरूरत के हिसाब से थानों की बैरकों में रखा जा सकेगा। यह रैक एक बड़ी चेन के साथ जमीन से संबद्ध कर दिए जाएंगे।
पुलिस के अपने कर्मियों ने ही चुराई राइफलें
बता दें कि वर्ष 2018 में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के बिजबिहाड़ा से एक पुलिस कांस्टेबल शाकूर अहमद ने 4 एके 47 राइफलें चुरा लीं। वहीं 2017 में कश्मीर के बडगाम जिले से कांस्टेबल नवीद मुश्ताक ने 4 एके 47 चुराईं और वह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हो गया। वर्ष 2018 में राजोरी जिले में पुलिस बराक से दो आतंकियों ने राइफलें चुरा लीं।
कश्मीर में मिलेगा सबसे अधिक फायदा
कश्मीर में ऐसे मामलों की अधिकता को देखते हुए यह रैक यहां पुलिस विभाग के लिए मददगार साबित होंगे। यहीं नहीं, इन राइफलों को यदि कोई भी चोरी करने की कोशिश करेगा तो उसका उसी समय पर पता चल जाएगा।