जम्मू। दिल्ली के मालवीय नगर रेस्टोरेंट में आग से 21 लोगों की मौतों ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बचाव कार्यों में हरी मार्केट व गुम्मट की तंग गलियां सबसे ज्यादा चुनौती बनेंगी। करीब दो दर्जन होटल और लॉज तक जाने व आने के लिए एक ही रास्ता है। इन होटलों में अमरनाथ यात्रा के दौरान हजारों यात्री ठहरते हैं। ऐसे में सुरक्षा ऑडिट अहम मुद्दा बन गया है।
पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 301 होटल हैं। करीब 218 होटल और लॉज ज्यूल चौक, हरि मार्केट, रेजीडेंसी रोड, गुम्मट, प्रेम नगर, तालाब खटिकां, गुज्जर नगर और पुराने शहर के अन्य इलाकों में हैं। सबसे बड़ी समस्या संकरी गलियां और सीमित पहुंच मार्ग हैं। यदि किसी होटल या लॉज में देर रात आग लग जाए तो बड़ी फायर टेंडर गाड़ियों का मौके पर पहुंचना आसान नहीं होगा जिससे स्थिति भयावह रूप ले सकती है।
यही नहीं, कई प्रतिष्ठानों में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हो रहा। नियमों के अनुसार होटल और गेस्ट हाउस में पर्याप्त क्षमता वाले पानी के टैंक, अग्निशामक यंत्र, हाइड्रेंट और हर मंजिल पर अग्निशमन उपकरण होने चाहिए। जमीनी स्तर पर नियमित जांच और सख्त निगरानी न होने से कीमती जिंदगियां दांव पर हैं। स्मार्ट सिटी के तहत फायर हाइड्रेंट नेटवर्क का विस्तार किया गया। पुराने शहर में 13 स्थानों पर हाइड्रेंट लगाए गए लेकिन केवल एक ही चालू अवस्था में है।
प्रदेश में आग लगने के बड़े मामले
मई 2014 : शहीदी चौक के पास होटल नीलम में आग लगने से चार लोगों की मौत और 11 लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे।
मई 2023 : रामबन में होटल में आग लगने से दो की मौत, पांच लोग झुलसे थे।
जून 2021 : डल झील किनारे शार्ट सर्किट के कारण होटल में आग लगी। 15-16 पर्यटकों को बचा लिया था।
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बड़े होटलों में अग्नि सुरक्षा की व्यवस्था है लेकिन छोटे होटलों और लॉज में समस्या है। संचालकों को सुरक्षा के लिए स्वयं प्रबंध करने चाहिए। हमारे पास आधुनिक उपकरण और गाड़ियां है, लेकिन तंग गलियों में समस्या आती है।
- हिमांशु गंडोत्रा, उप निदेशक अग्निशमन विभाग
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