जीत के चौके और हैट्रिक के लिए उतरे आधा दर्जन पूर्व विधायकों-मंत्रियों की साख दांव पर है। हर्ष देव, लाल सिंह, तारा चंद जीत का चौका तो तारिगामी जीत का पंजा लगाने की आस से चुनावी मैदान में है।
विधानसभा चुनाव खत्म होने के बाद अब मतगणना का बेसब्री से इंतजार है। इस बार के चुनाव में आधा दर्जन से ज्यादा विधायक व पूर्व मंत्री ऐसे हैं जो जीत की हैट्रिक व चौका लगाने की उम्मीद में उतरे हैं।
विज्ञापन
दस साल बाद हुए विधानसभा चुनाव में कई नए चेहरों ने तो चुनाव लड़ा ही, लेकिन बड़ी संख्या में पुराने चेहरे भी मैदान में हैं। इन चेहरों की साख दांव पर है। लंबे समय तक एक विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़कर विधायक बने इन नेताओं के सामने 2024 के विधानसभा चुनाव में बड़ी चुनौतियां थीं।
आठ अक्तूबर को आने वाले चुनाव परिणाम के बाद ये साफ हो जाएगा कि ये दिग्गज लोगों के बीच अपने वजूद को बनाए रखने में कामयाब रहे या नहीं।
नेता जो हैट्रिक लगाने की आस में
पूर्व मंत्री और मढ़ विधानसभा क्षेत्र से दो बार के विधायक रहे नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता अजय सड़ोत्रा, जम्मू नॉर्थ से पूर्व मंत्री शाम लाल शर्मा, सांबा से पूर्व मंत्री व दो बार के विधायक सुरजीत सिंह, गांधीनगर विधानसभा क्षेत्र से दो बार के विधायक व पूर्व मंत्री रमण भल्ला जैसे दिग्गज हैट्रिक लगाने की उम्मीद लेकर इस बार विधानसभा चुनाव के मैदान में हैं।
विज्ञापन
इन विधायकों व पूर्व मंत्रियों का राजनीतिक जीवन दांव पर
तारा चंद : 2009 से 2014 तक जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री रहे। इससे पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष रह चुके हैं। 30 अगस्त 2022 को उन्होंने गुलाम नबी आजाद के समर्थन में कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। बाद में फिर कांग्रेस में शामिल हो गए। छंब विधानसभा क्षेत्र से 1996, 2022 और 2008 में लगातार तीन बार जीत दर्ज की। इस बार जीत का चौका लगाने की उम्मीद में मैदान में हैं।
हर्ष देव सिंह: 2012 से 2022 तक जम्मू और कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी के अध्यक्ष रहे। 1996 से 2014 तक लगातार 18 वर्षों तक रामनगर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। 2002 से 2008 तक कांग्रेस और पीडीपी सरकार में शिक्षा मंत्री रहे। वह पैंथर्स पार्टी से पहले कैबिनेट मंत्री रहे। हर्ष देव सिंह 7 मई 2022 को आम आदमी पार्टी में शामिल हुए। 16 फरवरी 2023 को फिर जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी में शामिल हो गए।
जीएम सरूरी : गुलाम मोहम्मद सरूरी ने 2002 से 2018 तक किश्तवाड़ जिले के इंद्रवाल निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। सरूरी अगस्त 2022 तक कांग्रेस से जुड़े रहे। 2008 में राज्य मंत्री रहे। उन्होंने 2009-2010 तक मेकेनिकल इंजीनियरिंग और सड़क और भवन मंत्री के रूप में भी काम किया। पहली बार 1996 में इंद्रवाल विधानसभा क्षेत्र से स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, जिसमें लगभग 200 मतों से हार गए। इसके बाद कांग्रेस के सदस्य के रूप में 2002, 2008 और 2014 के चुनावों में लगातार विधानसभा के सदस्य चुने गए। इस बार निर्दलीय मैदान में हैं।
चौधरी लाल सिंह: चौधरी लाल सिंह बसोहली से 1996, 2002 और 2014 में विधायक रहे। पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार में वन, पर्यावरण, पारिस्थितिकी मंत्री थे। 2004 में 14वीं लोकसभा में उधमपुर निर्वाचन क्षेत्र से सांसद चुने गए। 2009 में 15वीं लोकसभा में वे फिर से वहीं से सांसद चुने गए।
मोहम्मद यूसुफ तारिगामी: 1996, 2002, 2008 और 2014 में कुलगाम विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के केंद्रीय समिति के सदस्य और कश्मीर में सीपीआई (एम) के पूर्व राज्य सचिव हैं। कुलगाम विस क्षेत्र में लोगों के बीच तारिगामी की छवि इमानदार नेता के रूप में है। इसी विस क्षेत्र से तारिगामी पांचवीं बार किस्मत आजमा रहे हैं।
तारिक हमीद कर्रा : श्रीनगर से 16वीं लोकसभा में सांसद रहे। वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हैं। 2014 के लोकसभा में पीडीपी के उम्मीदवार के रूप में नेशनल कॉन्फ्रेंस के डॉ. फारूक अब्दुल्ला को 40,000 से अधिक मतों से हराकर जीत हासिल की थी। डॉ. अब्दुल्ला की चार दशक में यह पहली चुनावी हार थी। जम्मू-कश्मीर सरकार में वित्त, योजना एवं विकास, कानून, संसदीय कार्य, आवास एवं शहरी विकास, वन, पर्यावरण व पर्यटन मंत्री रहे।