श्राइन बोर्ड क्षेत्र की पारिस्थितिकी का ध्यान रखते हुए भवन परिसर के जीर्णोद्धार के साथ-साथ एक शिवलिंग स्थापित करने की योजना है। शंकराचार्य मंदिर की ओर जाने वाले ट्रैक पर टाइलें, एलईडी लाइटें लगाने के साथ ही मंदिर मार्ग की स्थिति में सुधार किया जाएगा।
श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड तीन दशक बाद शंकराचार्य मंदिर का जीर्णोंद्धार करवाएगा। इस मंदिर का काम 1990 में शुरू हुआ था, लेकिन किन्हीं कारणों से आगे नहीं बढ़ पाया। वीरवार को श्राइन बोर्ड की टीम ने तकनीकी विशेषज्ञों के साथ शंकराचार्य मंदिर साइट का दौरा किया।
विज्ञापन
इस दौरान कटड़ा के पूर्वी हिस्से में पहाड़ी पर स्थित मंदिर की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की। वहीं, अधिकारियों ने मंदिर परिसर के कायाकल्प और विकास के लिए निर्देश दिए। श्राइन बोर्ड क्षेत्र की पारिस्थितिकी का ध्यान रखते हुए भवन परिसर के जीर्णोद्धार के साथ-साथ एक शिवलिंग स्थापित करने की योजना है।
शंकराचार्य मंदिर की ओर जाने वाले ट्रैक पर टाइलें, एलईडी लाइटें लगाने के साथ ही मंदिर मार्ग की स्थिति में सुधार किया जाएगा। बुनियादी ढांचे के विकास के तहत मार्ग में स्वच्छ पेयजल, स्वच्छ भोजन, चिकित्सा सुविधाओं का प्रावधान किया जाएगा।
विज्ञापन
श्राइन बोर्ड के सीईओ अंशुल गर्ग ने बताया कि एलजी के निर्देशानुसार और स्थानीय निवासियों की मांग पर मंदिर का जीर्णोंद्धार होगा। मंदिर श्री माता वैष्णो देवी के श्रद्धालुओं के लिए अन्य आध्यात्मिक गंतव्य के रूप में कार्य करेगा।
इससे धर्मनगरी की अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलेगा। मंदिर के निर्माण में डोगरा लोक कला और संस्कृति की झलक भी देखने को मिलेगी। इस मौके पर श्राइन बोर्ड के सदस्य डॉ. अशोक भान, डिप्टी सीईओ नवनीत सिंह, तकनीकी सलाहकार केएन राय और विश्वजीत सिंह आदि मौजूद रहे।