जम्मू-कश्मीर के सरकारी स्कूलों में ढांचागत कमी (इंफ्रास्ट्रक्चर गैप) दूर करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग काम करेगा। समग्र शिक्षा ने प्रदेश में दो हजार स्कूलों को चिह्नित किया है। इन स्कूलों में भवन, खेल मैदान, शौचालय, चहारदीवारी, लाइब्रेरी, साइंस लेबोरेटरी, किचन जैसे बुनियादी ढांचा नहीं है। इसके कारण इन स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था काफी प्रभावित हो रही है।
स्कूल शिक्षा विभाग पर स्कूलों के विकास को लेकर फंड आवंटन करने पर हमेशा भेदभाव का आरोप लगता रहा है। इमारत सहित अन्य सुविधाओं से पहले सुसज्जित स्कूलों में विकास को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन ऐसे स्कूलों को हमेशा नजरंदाज किया गया है, जिनकी स्थिति खराब है। विभाग ने ऐसे स्कूलों का कायाकल्प करने के लिए सर्वे करवाया था।
समग्र शिक्षा ने प्रदेश भर में ऐसे दो हजार स्कूलों को चिह्नित किया है, जिनका कायाकल्प किया जाएगा। इन स्कूलों में निर्माण कार्य रूपांतरण लागत से किया जाएगा। अगर किसी स्कूल में चहारदीवारी नहीं है तो मनरेगा के तहत उसका निर्माण करवाया जाएगा। विभाग इन स्कूलों पर खर्च होने वाले बजट को तय कर रहा है। ढांचागत बुनियादी सुविधाओं का बजट कम मिलने से स्कूलों में सुविधाओं का अभाव है। प्रदेश में तीन फीसदी स्कूलों में बिजली नहीं है। छह फीसदी स्कूलों में शौचालय नहीं हैं। ये स्कूल आरटीई के तहत तय मानकों को पूरा नहीं कर पाते हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर गैप को कम किया जाएगा। इसके लिए दो हजार स्कूलों को चिह्नित किया गया है। इन स्कूलों में ढांचागत कार्य होगा। इसके लिए बजट तैयार हो रहा है। ये निर्माण कार्य रूपांतरण लागत से किए जाएंगे।
-आलोक कुमार, प्रमुख सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग।