जम्मू-कश्मीर की विभिन्न बैंक शाखाओं के 72 हजार खातों में पड़े करोड़ों रुपये भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के खाते में जमा हो जाएंगे। आरबीआई इन रुपयों को ग्राहक शिक्षा और जागरूकता निधि फंड में जमा करवाएगी। बैंकों के ये ऐसे खाते हैं, जो बीते 10 साल से निष्क्रिय हैं, यानी इन खातों में कोई लेनेदेन नहीं किया गया।
आरबीआई गाइड लाइन के मुताबिक दो साल तक बैंक खातों से लेनदेन नहीं होने पर इन्हें निष्क्रिय श्रेणी में डाल दिया जाता है। ऐसे में उपभोक्ता केवाईसी इन खातों को संचालित कर सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक खातों का संचालन नहीं होने से बैंकों को इनकी देखरेख करने में दिक्कत होती है।
निष्क्रिय खाते को सक्रिय करने के लिए शाखा प्रबंधक को एक लिखित आवेदन देना होगा। इसमें खाता संचालित न करने का कारण भी बताना होगा। आवेदन पर खाते के सभी संयुक्त धारकों के हस्ताक्षर होने चाहिए।
केवाईसी दस्तावेज निष्क्रिय खाते के सक्रिय बनाने के अनुरोध के साथ नए केवाईसी दस्तावेज़ जमा करने होंगे। इसमें बैंक द्वारा स्वीकार्य फोटोग्राफ, पैन, पते का प्रमाण और पहचान का प्रमाण शामिल है।
लेन-देन खाते को सक्रिय बनाने के लिए खाताधारक को खाते में कुछ लेन-देन करना होगा जैसे कि कुछ राशि जमा करना। निष्क्रिय खाते को सक्रिय करने के लिए बैंक द्वारा कोई शुल्क नहीं लगाया जाता है।
आरबीआई की गाइडलाइन के अनुसार निष्क्रिय बैंक खातों को सक्रिय भी किया जा रहा है। आम लोग दस्तावेज लेकर बैंक में अपने खाते को आसानी से शुरू कर सकते हैं। -हेमराज, पीआरओ,जेएंडके बैंक