प्रदेश की बड़ी खबरों से संबंधित तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव को बड़ी जिम्मेदारी देते हुए वाणिज्य मंत्रालय में ओएसडी के रूप में नियुक्त किया गया है। इसके साथ ही वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अरुण कुमार मेहता प्रदेश के नए मुख्य सचिव बने। वहीं एक ओर दमकल विभाग के कर्मचारी पेड़ में फंसे एक बेजुबान पक्षी के लिए देवदूत बनकर तो दूसरी ओर सरहद पर देश की सेवा करने के साथ ही कश्मीर संभाग में जवान घर-घर जाकर कोरोना को मात देने के लिए लोगों को जागरूक कर रहे हैं। पढ़ें प्रदेश की कुछ और बड़ी खबरें...
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम को भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय में ओएसडी(ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) के रूप में नियुक्त किया गया है। वह 30 जून से वाणिज्य सचिव के रूप में कार्यभार संभालेंगे। सुब्रह्मण्यम 1987 बैच के आईएएस अफसर हैं।
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इंसानियत का मूल धर्म सभी प्राणियों को पीड़ा रहित वातावरण प्रदान करना है। कोरोना काल में कई ऐसी घटनाएं सामने आईं जब अपनों ने ही विषम परिस्थितियों में दामन छोड़ दिया। अधिकांश जगहों पर हृदय को कंपा देने वाले मामले देखने को मिले। इसके विपरीत समाज के कुछ लोग दिन-रात सेवा भाव से कार्य करके इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं। हम आपको जम्मू का एक ऐसा ही मामला बताने जा रहे हैं।
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कोविड-19 महामारी के वर्तमान समय में कोविड जागरूकता के साथ-साथ सभी आयु समूहों का समय पर टीकाकरण खतरे को कम करने के लिए आवश्यक है। इसके लिए भारतीय सेना अवाम को शिक्षित करने के लिए कश्मीर के ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चला रही है।
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दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले में कोरोना वारियर्स तबस्सुम आरा भी वैक्सीनेशन अभियान का हिस्सा हैं। जिले के अस्पताल में तैनात वैक्सीनेशन अफसर तबस्सुम 4 माह से ज्यादा समय में 6000 से अधिक लोगों का टीकाकरण कर चुकी हैं। उन्होंने ज्यादा से ज्यादा लोगों को कवर करने के लिए डोर टू डोर मिशन भी शुरू किया है। तबस्सुम ने कहा कि लोगों को सेवाएं देकर उन्हें काफी खुशी होती है। परिवार का भी उन्हें सहयोग मिलता है।
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सेना की 15वीं कोर ने स्वयंसेवी संस्था के साथ मिलकर किन्नर समाज से जुड़े करीब 100 लोगों को मुफ्त खाने पीने का सामान और कोरोना के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाइयां बांटी। हाबला नाम के एक किन्नर के अनुसार ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी ने उनके बारे में सोचा। उन्होंने कहा कि सभी जगहों पर किन्नरों को सरकार जमीन देती है, मासिक पेंशन देती है और अन्य सुविधाएं देती है, लेकिन इस जगह पर पर अगर किराया न दें तो घर से निकाला जाता है। फिर बिजली का बिल न दें तो बिजली काट दी जाती है। ऐसे में कुछ किन्नर गलत काम भी करने पर मजबूर हो रहे हैं।
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