प्रदेश में बाजरा उत्पादन और इसकी खपत को बढ़ावा देने के लिए 15 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी परियोजना को मंजूरी दी है। अगले तीन साल में इस परियोजना को पूरा किया जाएगा। ताकि बाजरा की खेती, इसकी पैदावार बढ़ाने, प्रमोशन करने में किसानों के बीच संभावनाएं पैदा की जा सकें।
यह पहल बाजरा के पोषण मूल्य के बारे में जागरूकता पैदा करने का भी एक बड़ा प्रयास है। जो प्रोटीन, सूक्ष्म पोषक तत्वों और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होते हैं। बदलते क्लाइमेट में बाजरा एक चमत्कारी अनाज के रूप में देखा जा रहा है। जो भविष्य का अनाज भी कहा जा रहा है। प्रदेश में इस समय 8310 हेक्टेयर में बाजरा की खेती होती है, जिसे 14 हजार हेक्टेयर तक बढ़ाने की योजना है।
इसे सूखा प्रवण क्षेत्रों में उगाया जा सकता है। साथ ही इसे बड़ी मात्रा में पानी या बाहरी इनपुट की आवश्यकता नहीं होती है। छोटे पैमाने के किसानों के लिए यह एक आदर्श फसल बनती है। यह एक दोहरे उद्देश्य वाली फसल भी है, जो खेती की आर्थिक दक्षता में योगदान देने के अलावा भोजन और चारा दोनों प्रदान करती है।
पिछले कुछ वर्षों में बाजरा के अंदर कई स्वास्थ्य लाभों और खाद्य सुरक्षा चुनौतियों के स्थायी समाधान खोजने की आवश्यकता के कारण नए सिरे से रुचि पैदा हुई है। दुनिया भर की सरकारों और संगठनों ने बाजरा को एक पौष्टिक, टिकाऊ और किफायती खाद्य विकल्प के रूप में बढ़ावा देना शुरू कर दिया है।
भारत सरकार बाजरा की खेती, प्रसंस्करण और विपणन को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है और पूर्व में 2018 को बाजरा का राष्ट्रीय वर्ष घोषित किया गया था। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी, भारत सरकार के इशारे पर, बाजरा के स्वास्थ्य लाभ और स्थायी उत्पादन और खपत के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 2023 को अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में घोषित किया है।
कृषि उत्पादन विभाग के आयुक्त सचिव अटल डुल्लू का कहना है कि बाजरे की बढ़ती जागरूकता और लोकप्रियता के बावजूद, इसका उत्पादन और खपत अभी भी सीमित है और कई चुनौतियां हैं जिनका समाधान किए जाने की आवश्यकता है। महत्वपूर्ण चुनौतियों में से एक किसानों और उपभोक्ताओं के बीच बाजरा के बारे में जागरूकता और ज्ञान की कमी है।
कई किसान अभी भी बाजरा की खेती के लाभों से अनजान हैं। वह उच्च लागत वाली फसलों की खेती के लिए संघर्ष कर रहे हैं। जिसके परिणामस्वरूप मिट्टी की उर्वरता और जल संसाधनों में कमी आती है, ये ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें यह महत्वाकांक्षी परियोजना हल करेगी। इसकी प्रमोशन उन 29 परियोजनाओं में शामिल है, जिसको सरकार ने मंजूरी दी थी।