गांव रत्तियां के रहने वाले रंजीत सिंह ने बताया कि नहर में पानी छोड़ने से पहले हर साल गाद निकाली जाती है। इसे दूसरी जगह डालने के बावजूद सड़क किनारे ही ढेर लगा दिए गए हैं। इससे पूरे इलाके लोगों को परेशानी हो रही है।
नहरों में सफाई के नाम औपचारिकताएं मात्र की गई हैं। पहले तो गंदगी साफ किए बिना ही पानी छोड़ दिया गया। न ही नहरों से ठीक तरह से गाद निकाली गई। जबकि जिन जगहों से गाद निकाली भी गई, उसके नहर और सड़क किनारे ही ढेर लगा दिए गए।
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आलम यह है कि अब धूल उड़ती है और हादसे होने का डर बना रहता है। मीरां साहिब के रत्तियां गांव के पास नहर के किनारे गाद के ढेर लगे हैं। हर रोज वाहनों की आवाजाही से गाद से उड़ने वाली धूल लोगों की नाक में दम कर रही है।
गांव रत्तियां के रहने वाले रंजीत सिंह का कहना है कि नहर में पानी छोड़ने से पहले हर साल गाद निकाली जाती है। गाद तो निकाल दी गई है, लेकिन इसे कहीं और जगह फेंकने के बजाय नहर और सड़क किनारे ही ढेर लगा दिए गए हैं। क्योंकि रात को नहर के पास रोशन भी नहीं है।
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इस वजह से हादसे होने की आशंका बनी रहती है। राहगीर निर्मल कुमार का कहना है कि दिन में भी गाद से इतनी धूल उड़ती है कि पास से गुजरना मुश्किल हो जाता है। वह हर रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं। बता दें कि रणबीर नहर कई जगहों से होकर गुजरती है।
गांव मरालियां के रहने वाले किसान नेता किशोर कुमार भी इसका कड़ा विरोध जता चुके हैं। चीफ इंजीनियर मनोज गुप्ता का कहना है कि नहरों से गाद अच्छे से निकाली गई है। जल्द ही इसे उठाकर सही जगह ठिकाने लगाया जाएगा।