कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गुलाम अहमद मीर ने कहा कि पार्टी किसी भी चुनाव के बहिष्कार के समर्थन में नहीं रही है, लेकिन पंचायत उपचुनाव में मौजूदा जमीनी हालात पर सरकार उन पर बहिष्कार का दबाव बना रही है। पार्टी मुख्यालय में उन्होंने कहा कि मैं चुनौती देता हूं कि अगर भाजपा में हिम्मत है तो कांग्रेस नेताओं को अपने इलाकों में राजनीतिक गतिविधियां करने की इजाजत दें, कांग्रेस आज भी दलीय स्तर पर लड़ने को तैयार है।
अगर प्रशासन पार्टी के लोगों को जम्मू-कश्मीर में अपनी सियासी गतिविधियां चलाने की इजाजत नहीं देगा तो हम मीडिया के माध्यम से चुनाव के लिए लोगों को जागरूक करेंगे। वह चाहे पार्टी के चिन्ह पर न लड़ें, लेकिन यह साफ है कि भाजपा जिन सीटों पर जीतने का लक्ष्य देख रही है, उसमें कामयाब नहीं होगी। जम्मू-कश्मीर में जम्हूरियत का कत्ल किया जा रहा है।
2018 के पंचायत चुनाव और 2019 के बीडीसी चुनाव में सरकार ने 100 फीसदी मतदान के दावे किए थे। फिर आज करीब 13000 पदों पर दोबारा पंचायत उपचुनाव क्यों करवाए जा रहे हैं। सरकार पहले गैर दलीय और अब दलीय स्तर पर चुनाव करवा रही है।
ऐसे में सरकार पहले वाली नोटिफिकेशन रद्द करे या अब जमीनी स्तर पर चुनाव के लिए हालात अनुकूल बनाए। भाजपा को छोड़कर किसी अन्य दल का नेता मैदान में नहीं है, क्योंकि उन्हें प्रशासन से इजाजत नहीं दी गई है। कांग्रेस लड़कर पूर्व राज्यपाल से पंचायत के संशोधित थ्री टायर सिस्टम को वापस लाई थी।