दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले से एक बीमार मां की अपील सामने आई है। जिला अस्पताल इलाज के लिए पहुंची इस मां ने सेहत की परवाह न करते हुए अपने बेटे की सुरक्षित घर वापसी की अपील की। अपने दर्द को भूल कर अपने बेटे को वापस आने की अपील की गई। साथ ही यह भी कहा कि जिस किसी के भी कब्जे में उसका बेटा है उनसे हाथ जोड़ कर अपील करती हूं कि मेरा बेटा लौटा दो। बता दें कि इसका बेटा दानिश 5 मई को घर से निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिवार ने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई है।
दरअसल अनंतनाग के जिला अस्पताल में 18 वर्षीय दानिश की मां को इलाज के लिए लाया गया था क्योंकि बेटे के लापता होने के चलते वो सदमे में है। उसका रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार वालों को अब उसकी सेहत की चिंता सता रही है। इलाज कराने के लिए अस्पताल पहुंची दानिश की मां रो पड़ी और उसने अपने बेटे को घर आने की अपील कर डाली। इस बीच सामने आए वीडियो में उसकी मां कह रही है, उसको कहो तुम्हारी मां टूट गई है... उसको 4 दिन हुए... अगर वह आर्मी के पास है तो घर आ जाए... अगर आतंकियों के पास है तो मैं हाथ जोड़कर उनसे उसे छोड़ने को कहती हूं... मैं डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की मरीज हूं... मेरी आंखें थक गई हैं... मैं तुमसे माफी मांग रही हूं, मेरे दानिश, बेटे तुम घर आ जाओ... मेरा पूरा जिस्म थरथरा रहा है...आतंकियों से अपील है कि अगर उनके पास है तो उसे वापस छोड़ दें... मेहरबानी करके घर आ जाओ...मैं टूट चुकी हूं।
दानिश के पिता गुलजार अहमद के अनुसार वह 5 मई को शाम को घर से नमाज पढ़ने के लिए निकला और वापस नहीं आया। उन्होंने कहा कि जब खाना खाने का वक़्त आया तो उन्होंने उसे फोन किया, लेकिन उसका फोन बंद आया। गुलजार के अनुसार वह रात भर फोन करते रहे, लेकिन संपर्क नहीं हो पाया। उसके बाद उन्होंने सभी रिश्तेदारों से दानिश के बारे में पूछताछ की, लेकिन किसी से भी कोई सुराग हाथ नहीं लग पाया। गुलजार ने कहा कि इस संबंध में पुलिस में भी शिकायत दर्ज की है। पुलिस ने आश्वासन दिलाया कि वह उसे ढूंढ लेंगे।
जानकारी के अनुसार दानिश 2016 में जब बुरहान वानी के मारे जाने के बाद हालात खराब हुए थे तब भी पकड़ा गया था और कुछ दिन थाने में बंद था। इसे देख यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं वो आतंकवाद में शामिल न हो गया हो। बता दें कि घाटी विशेष रूप से दक्षिणी कश्मीर में हाल ही में दो से अधिक युवा ऐसे भी हैं जो आतंकवाद का रास्ता छोड़ अपने घर वापस लौट आए हैं। हालांकि सुरक्षा कारणों के चलते उनके नाम पते सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन उनके वापस लौटने को एक अच्छा संकेत माना जा रहा है। जबकि सेना के आला अधिकारी भी बार-बार ऐसे युवाओं को आतंक का रास्ता छोड़, मुख्य धारा में आने की घोषणा करते आ रहे हैं।