जम्मू-कश्मीर में अब आतंकियों तथा ओवर ग्राउंड वर्करों के मूवमेंट को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिये ट्रैक किया जाएगा। इसके लिए जम्मू संभाग में पहल की गई है। जम्मू में प्रवेश करने वाले रास्तों पर अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित फेशियल रिकॉगिनेशन सिस्टम स्थापित किया जाएगा। इसकी शुरुआत किश्तवाड़ से कर दी गई है। यहां दो स्थानों पर यह प्रणाली स्थापित की गई है। धीरे-धीरे इसे जम्मू संभाग की सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से प्रमुख स्थानों पर स्थापित किया जाएगा।
पुलिस की योजना है कि जम्मू संभाग में आतंकियों, ओजीडब्ल्यू, अपराधी, भगोड़े, हिस्ट्रीशीटर, नशा तस्करों आदि का मूवमेंट होते ही तत्काल पता चल जाए। इसके लिए नाके पर दस्तावेज चेक करने की आवश्यकता कम हो जाएगी। यदि कोई नाके से गुजरता है तो वहां लगे कैमरे से तत्काल सिस्टम को मैसेज जाएगा। मैसेज का सिस्टम डाटा के विश्लेषण के साथ ही पांच से 10 सेकेंड के भीतर यह बता देगा कि जो व्यक्ति गुजरा है वह संदिग्ध है या नहीं। संदिग्ध व्यक्ति का पता लगते ही अलार्म बजने लगा।
दरअसल इसके लिए कंप्यूटर आधारित सिस्टम में अपराधियों के उपलब्ध सभी फोटो, उनके विषय में सभी जानकारियां फीड करनी होंगी। कैमरे से फोटो मिलते ही यह सिस्टम में उपलब्ध डाटा से विश्लेषण कर यह बता देगा कि गुजरने वाले व्यक्ति के लक्षण फीड जानकारियों से मेल खा रहे हैं। इसके साथ ही अलार्म बजने लगेगा। तत्काल ऐसे व्यक्ति को नाके पर पकड़ने में मदद मिल सकेगी।
किश्तवाड़ में दो स्थानों पर यह प्रणाली स्थापित की गई है। एक जम्मू से जिले में प्रवेश करने वाले ठाठरी तथा दूसरा कश्मीर से जोड़ने वाले सिंथन टॉप इलाके में चिनगाम में इसे लगाया गया है। जिले में शुरू प्रणाली में फिलहाल चार हजार लोगों के डाटा फीड किए जा चुके हैं। इसे 25 हजार तक करने का लक्ष्य रखा गया है। किश्तवाड़ के एसएसपी खलील पोसवाल ने बताया कि यह पूरा सिस्टम डाटा का खेल है। जितने अधिक लोगों के विषय में डाटा होगा उतना ही यह सफल होगा। इसके लिए सभी जिलों से अपराधियों का डाटा एकत्र किया जा रहा है।
63 हजार में सिस्टम तैयार
किश्तवाड़ के एसएसपी खलील पोसवाल ने बताया कि वैसे तो यह सिस्टम काफी महंगा है। इस्त्राइली उपकरण पांच करोड़ तक आएगा। यदि अकेला उपकरण लिया गया तो 10 लाख खर्च होंगे, लेकिन किश्तवाड़ में उपलब्ध संसाधनों के आधार पर इसे मात्र 63 हजार रुपये में तैयार कर स्थापित किया गया है। इसके परिणाम भी बेहतर आ रहे हैं। बताया कि छह महीने से अधिक समय से इस सिस्टम को स्थापित करने की दिशा में प्रयास चल रहे थे। पूरी तरह से इसके अपग्रेड होने में आठ से 10 महीने का समय लग सकता है।
स्मार्ट पुलिसिंग पहल का यह हिस्सा है। इस अत्याधुनिक पहल को अन्य स्थानों पर भी लागू किया जाएगा। इससे न केवल आतंकवाद बल्कि स्थानीय अपराधों के खतरों से भी निपटने में मदद मिलेगी। लोगों की सुरक्षा के साथ ही अपराधों पर प्रभावी अंकुश भी पाया जा सकेगा।
-आनंद जैन, आईजी जम्मू