दो माह के अंतराल में बिजली विभाग की लापरवाही से करंट के कारण नौ कर्मचारियों की मौत हो गई जबकि दो घायल हुए हैं। सबसे ज्यादा सात मौतें जिला जम्मू में हुई हैं। आंकड़ों के अनुसार 1995 से लेकर अब तक 28 साल में 90 कर्मचारियों की जान करंट लगने से गई है और 180 दिव्यांग हो चुके हैं। इनमें से 270 के करीब परिवारों को सालों से मुआवजा नहीं मिला है। पीड़ित परिजन 28 साल से विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।
कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने बताया कि जितनी भी मौतें हुई हैं, वह लापरवाही के चलते हुई हैं। इसका दूसरा बड़ा कारण सरकारी कर्मचारियों के पास पूरे सुरक्षा उपकरण नहीं होना भी है। आरएसपुरा क्षेत्र के रहने वाले और बिजली विभाग से लाइनमैन के तौर पर सेवानिवृत्त चमन लाल ने बताया कि लाइनमैन के पद खाली होने हैं और दिन प्रतिदिन कर्मियों की संख्या कम होती जा रही है। हालात यह हैं कि लाइनमैन को विभाग की ओर से किसी प्रकार के सुरक्षा उपकरण उपलब्ध नहीं करवाए जाते। अपनी सुरक्षा के लिए गलब्ज और बूट तक कर्मचारी जेब से पैसा देकर खरीदते हैं।
राजोरी, आरएसपुरा और सांबा में तीन की मौत, एक को नहीं मिला मुआवजा
राजोरी में नौ जुलाई को फाल्ट ठीक करते समय करंट लगने से थन्नामंडी की मन्याल गली में बिजली विभाग के कर्मचारी की मौत हो गई थी। विभाग ने पीड़ित परिवार को 11 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की थी। आरएस पुरा में 11 मार्च को सीमावर्ती गांव मोटे के पास लाइनमैन प्रेमलाल की काम करते हुए मौके पर ही करंट लगने से मौत हो गई थी, लेकिन पीड़ित परिवार को पांच माह बाद भी राहत राशि नहीं मिल पाई। इसी प्रकार सांबा में 10 अगस्त को स्मार्ट मीटर लगाते हुए ठेके पर रखे युवक की करंट लगने से मौत हो गई। हालांकि, परिवार ने जम्मू-पठानकोट हाईवे पर तीन घंटे प्रदर्शन किया तो प्रशासन ने 11 लाख रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है।
पति की करंट से मौत पर यूनियन ने मदद दी; लेकिन विभाग ने नहीं, घर चलाना हुआ मुश्किल
आरएसपुरा में करंट से जान गंवाने वाले लाइनमैन प्रेम लाल की पत्नी राज कुमारी ने बताया कि 58 वर्ष की आयु में पति की जान चली गई। परिवार की न तो विभाग और न ही प्रशासन ने कोई मदद की है। इतना जरूर है कि बिजली कर्मचारियों की यूनियन ने कुछ आर्थिक मदद दी थी। अब हालात यह हैं कि घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। ग्रेजुअटी की राशि तक के लिए धक्के खाने पड़े। आवेदन करने पर मुश्किल से पैसा मिला, जिससे घर का खर्च चल रहा है। बेटा भी बिजली विभाग में अस्थायी लाइनमैन है। उसे भी दो-तीन माह के बाद ही वेतन मिलता है।
बेटे को जबरदस्ती खंभे पर चढ़ाया, करंट लगने के बाद दो घंटे तक तड़पता रहा
बाड़ी ब्राह्मणा में वीरवार को करंट लगने से 30 साल के युवक शब्बीर हुसैन की करंट लगने से मौत हो गई थी। उसके पिता नूर आलम ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के जेई ने उनके बेटे शब्बीर हुसैन को घर से काम पर आने के लिए मजबूर किया था। शब्बीर गर्भवती पत्नी को दिखाने के लिए जीएमसी जम्मू जा रहा था। तभी जेई ने शब्बीर को धमकाया कि अगर वह काम पर नहीं आएगा तो उसका बकाया पैसा नहीं मिलेगा। मजबूरन शब्बीर पत्नी को रास्ते में छोड़कर जेई के साथ चला गया। जेई सरकारी कर्मचारी है, तब भी उसने स्मार्ट मीटर लगाने का ठेका लिया है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिजली विभाग का सरकारी कर्मचारी कैसे ठेका कैसे ले सकता है? जेई ने बिना बिजली बंद करने की जानकारी लिए शब्बीर को खंभे पर चढ़ा दिया। शब्बीर करंट लगने से गिर गया और दो घंटे वहीं तड़पता रहा।
बड़ा सवाल-कौन चालू कर देता है अचानक बिजली, यह लापरवाही नहीं तो और क्या?
दो महीने में करंट से हुई सभी मौतों के पीछे एक ही कहानी है और वह है अचानक करंट आने से। पुलिस रिपोर्ट में यही लिखवाया जाता है। यह सब मौतें एक ही बड़ा सवाल खड़ा करती हैं कि विभाग लापरवाह नहीं तो आखिर यह बिजली अचानक कौन चालू कर देता है। एक सवाल यह भी उठता है कि मौतों के किसी मामले में बड़े अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई न ही इन मौतों से कोई सबक लिया गया।