लेह। एग्लिंग में जिला नशा मुक्ति केंद्र तो स्थापित कर दिया गया है, लेकिन नशे से पीड़ित लोग समाज के दबाव में इस केंद्र की मदद लेने से हिचकिचा रहे हैं। लद्दाख हार्ट फाउंडेशन में इस केंद्र का उद्घाटन जून में किया गया था। इसका उद्देश्य नशा मुक्ति के लिए व्यापक सहायता प्रदान करना है।
केंद्र के प्रबंधक और प्रभारी थिनलेस नॉरबू ने इस समस्या पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, हालांकि लेह में नशीली दवाओं का दुरुपयोग बढ़ रहा है, फिर भी कई लोग सामाजिक दबाव के कारण मदद लेने से हिचकिचाते हैं। नशे की लत के प्रति कलंक इतना मजबूत है कि कुछ लोग यहां उपलब्ध संसाधनों का उपयोग करने के बजाय लद्दाख के बाहर मदद लेना पसंद करते हैं।
उन्होंने कहा कि इसके लिए जागरूक किया जाना बहुत जरूरी है। इसमें स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और नागरिक समाज के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। कलंक को तोड़ने के लिए लेह के समाज के प्रभावशाली लोगों को नशा और उसके उपचार के बारे में सामान्य बातचीत को बढ़ावा देना होगा। यह कदम न केवल जागरूकता फैलाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उन लोगों को भी प्रोत्साहित करेगा जो नशे की लत से प्रभावित हैं, ताकि वे बिना किसी डर के स्थानीय मदद ले सकें।
उन्होंने कहा कि परिवार और व्यक्ति नशेड़ी का लेबल लगने से डरते हैं। इसके चलते वह इलाज से बचना पसंद करते हैं। उन्होंने कहा, समुदाय को एकजुट होकर इस कलंक को मिटाना होगा।
इस समस्या के हल के लिए केंद्र ने जीवन कौशल के लिए सामुदायिक रोकथाम और हस्तक्षेप कार्यक्रम नामक एक निवारक पहल शुरू की है। यह सहकर्मी-नेतृत्व वाली शिक्षा कार्यक्रम लोगों को नशे का विरोध करने के लिए ज्ञान और कौशल प्रदान करता है। फिर भी, उपचार सेवाओं की तरह, यह निवारक उपाय भी समुदाय की सक्रिय भागीदारी पर निर्भर करता है।