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कश्मीरी युवा प्रतिभाशाली, उन्हें अवसर मिलना चाहिए : किरण बेदी

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श्रीनगर। भारत की अंतरराष्ट्रीय एकता आंदोलन (आईआईएमयूएन) ने मंगलवार को श्रीनगर में अपनी रोल मॉडल सीरीज के दूसरे संस्करण का आयोजन किया। इस संस्करण के वक्ताओं में शामिल आईपीएस और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल डॉ. किरण बेदी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने कश्मीरी युवाओं की प्रतिभा और उत्साह की जमकर सराहना की। किरण बेदी ने कहा, कश्मीरी युवा हमेशा से प्रतिभाशाली रहे हैं, समस्या केवल उन्हें अवसर प्रदान करने की थी। वहीं आईआईएमयूएन पिछले एक दशक से अधिक समय से इस दिशा में अथक प्रयास कर रहा है और सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरी तरह से छात्रों द्वारा संचालित है।
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डॉ. बेदी ने अपने संबोधन में कहा, मैंने बच्चों को बहुत प्रेरणादायक पाया। मुझे लगता है कि उन सभी के पास एक दृष्टिकोण और सपना है। अब जब शांति काफी हद तक बहाल हो चुकी है, उनके लिए सभी संभावनाएं और अवसर खुल रहे हैं। यह देश का नेतृत्व करने का एक शानदार अवसर है। डॉ. बेदी ने आईआईएमयूएन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह संगठन कश्मीरी युवाओं को मंच प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस आयोजन का उद्देश्य स्कूली बच्चों को उन व्यक्तित्वों से रूबरू कराना था, जो न केवल उत्कृष्ट और मेहनती कॅरिअर के लिए प्रेरणादायक हैं, बल्कि अपने निजी जीवन में भी आदर्श हैं। घाटी के 25 से अधिक स्कूलों के 500 छात्रों की उपस्थिति में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अनंतनाग से बारामुला और बडगाम से बांदीपोरा तक के स्कूली छात्रों ने वक्ताओं के अनुभव सुने।
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कार्यक्रम का संचालन आईआईएमयूएन के कोर काउंसिल सदस्य और जम्मू-कश्मीर प्रमुख अतीब इम्तियाज वंत ने किया। अतीब स्वयं इस संगठन की सफलता की कहानी हैं, जो कश्मीरी युवाओं को मंच और अवसर प्रदान करने के लिए प्रयासरत हैं। 2019 में वह आईआईएमयूएन श्रीनगर सम्मेलन में एक प्रतिभागी थे और आज वह वैश्विक संचालन का नेतृत्व करने वाली सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था, कोर काउंसिल का हिस्सा हैं। कार्यक्रम में वक्ताओं में नासिर सोगामी, मुख्यमंत्री के सलाहकार तनवीर सादिक, पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती, उपायुक्त कुलगाम भी शामिल हुए।
बता दें कि आईआईएमयूएन एक युवा संचालित गैर-लाभकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 2011 में हुई थी। इसका उद्देश्य शांति और अहिंसा के भारतीय विचार को युवाओं में फैलाकर विश्व को एकजुट करना है। यह संगठन 108 शहरों में वार्षिक सम्मेलन, साहित्य उत्सव, नेतृत्व कार्यक्रम और यात्राएं आयोजित करता है, जिसमें 7,000 से अधिक स्वयंसेवकों की टीम काम करती है।
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